अवैध संबंधों के शक में पत्नी ने की आत्महत्या तो पति दोषी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पराई औरत से संबंध के शक पर पत्नी अगर आत्महत्या कर लेती है तो इसके लिए पति को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पत्नी ने शक्की स्वभाव के कारण मौत को गले लगा लिया जबकि हकीकत में यह मात्र संदेह था। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव रॉय की बेंच ने कहा कि शक का आधार तलाक के लिए पर्याप्त सबूत हो सकता है लेकिन फौजदारी कानून के तहत यह ठोस सबूत नहीं है।



आईपीसी की धारा 306 के तहत पति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने लिए उसी स्थिति में दोषी ठहराया जा सकता है, जब पति ने वास्तव में उस पर जुल्म ढाए हों। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस के तय चौंकाने वाले हैं। पत्नी जिस महिला के साथ पति के संबंध बता रही थी, खुदकुशी की खबर सुनकर उसने भी आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का सिलसिला यही नहीं रुका। उसके पिता और भाई ने भी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसलिए विवाहेत्तर संबंध का शक वाजिब नहीं था।




सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह निर्णय दिया। हाई कोर्ट ने केवी प्रकाश बाबू को धारा 306 के तहत चार साल की सजा दी थी। प्रकाश का विवाह 1997 में अंजना के साथ हुआ था। उसे पति पर संदेह था कि उसके दीपा से संबंध हैं। वह उसके घर लगभग हर रोज ही आता जाता है। गांव के लोग भी इस तरह का अफवाह उड़ाते थे। 2004 में उसने आत्महत्या कर ली। ट्रायल कोर्ट ने पत्नी को तंग करने के आरोप में पति को आईपीसी की धारा 498ए के तहत भी दोषी ठहराया था जबकि दहेज उत्पीड़न अधिनियम में बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहेत्तर संबंध का शक पत्नी पर क्रूरता के दायरे में नहीं आता। इसलिए उसे धारा 498 के अंतर्गत भी दोषी करार नहीं दिया जा सकता।