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12 साल प्रजातंत्र के बाद नेपाल में अब क्यों उठने लगी 240 साल पुरानी ‘हिंदू’ राजशाही की मांग?

By Editor-Vijay Chaurasiya 
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नेपाल में ज़ोर पकड़ रही है राजतंत्र को फिर से बहाल करने की मांग,भैरहवां बुटवल में प्रदर्शन

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महराजगंज । नेपाल की सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की आंतरिक कलह और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांगों के बीच राजशाही की पुन: बहाली की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। पिछले हफ्ते से नेपाल के पोखरा और बुटवल जैसे बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों में लोग नेपाल में हिन्‍दू अधिराज्‍य की स्थापना करने वाले पृथ्‍वी नारायण शाह की तस्‍वीरें लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। गुरुवार को भैरहवां में राजशाही के समर्थन में प्रदर्शन हुआ।

यह प्रदर्शन नागरिक समाज रुपनदेही के तत्वावधान में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने भैरहवा के लुम्बिनी गेट से जुलूस निकाला जो बुद्ध चौक, देवकोटा चौक, बैंक रोड, मिलन चौक होते हुए लुम्बिनी गेट पहुंचा। यहां एक सभा में वक्‍ताओं ने नेपाल में राजतंत्र की जोरदार वकालत की। उन्‍होंने नेपाल में हिन्दू राष्ट्र की पुन: स्‍थापना की जरूरत बताई।

कार्यक्रम के संयोजक रवि कुमार रौनियार ने कहा कि नेपाली जनता की मांग है कि नेपाल हिन्दू राष्ट्र हो। राजनीतिक पार्टियां अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रही हैं। इसकी वजह से देश में राजतंत्र की वापसी हो। सभा को रंजन खनाल, मनोज कुमार झा, बलराम शर्मा, गोपाल शर्मा, मोहम्मद शामिल आदि ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि राजतंत्र वक्त की जरूरत हो गया है। राजतंत्र की पुन: स्थापना होने से ही राष्ट्र का भला हो सकता है। वहीं हिन्दू राष्ट्र की मांग करते हुए इसके लिए हर स्तर तक संघर्ष करने का ऐलान किया गया।

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‘राजा लाओ-देश बचाओ’ के बुलंद हुए नारे…

राजतंत्र की स्थापना की मांग को लेकर निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में बाइक सवार चल रहे थे। जुलूस में ‘राजा लाओ-देश बचाओ’ और हिन्दू राष्ट्र की मांग को लेकर लोग नारेबाजी करते हुए चल रहे थे।

राजनीतिक दलों का जनहित भूलने का परिणाम…

नेपाल के नागरिक मानते हैं कि राजनीतिक दल जनहित भूल चुके हैं। पक्ष और विपक्षी दोनों के खिलाफ लोग वैकल्पिक मोर्चा खड़ा करने का मन बना रहे हैं। सामयिक विषयों के विशेषज्ञ बिस्वास बरल के अनुसार लोग मानते हैं कि सरकार कोविड-19 और भ्रष्टाचार नियंत्रित करने में विफल रही, संघीय ढांचे को भी पुख्ता नहीं कर सकी।

पृथ्वी नारायण की तस्वीरें प्रदर्शन में….

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लोग 18वीं सदी में आधुनिक नेपाल राज्य के संस्थापक पृथ्वी नारायण शाह की तस्वीर प्रदर्शन में लेकर आ रहे हैं। वे 240 साल पुरानी राजशाही को खत्म कर 2008 में स्थापित हुई मौजूदा शासन व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। 2015 में नेपाल का नया संविधान बना, जिसमें वह संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया गया। 2017 में पहले चुनाव हुए, वाम दलों का गठबंधन सत्ता में आया। केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री बने, जिन्हें सांविधानिक व संघीय मूल्यों की स्थापना करनी थी, लेकिन वे विफल होते नजर आ रहे हैं।

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