1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. आखिर क्यों युधिष्ठिर को छोड़ द्रौपदी व बाकी पांडव नहीं जा पाए थे सशरीर स्वर्ग

आखिर क्यों युधिष्ठिर को छोड़ द्रौपदी व बाकी पांडव नहीं जा पाए थे सशरीर स्वर्ग

By आराधना शर्मा 
Updated Date

After All Except Yudhishthira Draupadi And The Rest Of The Pandavas Were Not Able To Go To Heaven

नई दिल्ली: महाभारत की कहानी के बारे मे हर कोई जनता होगा। प्रभु श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद वेदव्यास की बात मानते हुए राज-पाठ छोड़कर पांडवों ने द्रौपदी समेत सशरीर स्वर्ग जाने का फैसला किया। स्वर्ग जाने से पूर्व युधिष्ठिर ने परीक्षित को सारा राज-पाठ सौंप दिया तथा द्रौपदी समेत सभी पांडव साधु का वस्त्र धारण कर स्वर्ग के लिए निकल पड़े।

पढ़ें :- Viral Video: गाने की धुन पर कछुए ने किया जबरदस्त डांस, देखने वाले नहीं रोक पाये अपने हंसी

आपको बता दें, द्रौपदी समेत पांडव जब स्वर्ग जाने लगे तो उनके साथ-साथ एक कुत्ता भी चलने लगा। द्रौपदी समेत सभी पांडव यही चाहते थे कि हम सशरीर स्वर्ग पहुंचें। लेकिन मार्ग में युधिष्ठिर को छोड़कर द्रौपदी समेत बाकी पांडव एक-एक करके मृत्यु को प्राप्त हो गए। आइए जानते हैं कि किन पापों के कारण युधिष्ठिर को छोड़ बाकी सभी लोग मार्ग में गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए थे।

पहले गिरीं द्रौपदी

स्वर्ग जाते वक़्त जब पांचों पांडव, द्रौपदी तथा कुत्ता सुमेरु पर्वत पर चढ़ रहे थे तो उसी वक़्त द्रौपदी लड़खड़ाकर गिर पड़ीं। द्रौपदी के गिरने पर भीम ने युधिष्ठिर से पूछा कि ‘द्रौपदी किस पाप के कारण गिर पड़ीं’ ? इस पर युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कि ‘द्रौपदी हम सब में सबसे ज्यादा प्रेम अर्जुन को करती थी इसलिए वह गिर पड़ी। ऐसा बोलकर बिना पीछे देखे युधिष्ठिर आगे बढ़ गए।

फिर गिरे सहदेव

द्रौपदी के गिरने के पश्चात् थोड़ी ही देर में सहदेव भी गिर पड़े। सहदेव के गिरने पर जब भीम ने युधिष्ठिर से पूछा तो युधिष्ठिर ने कहा कि सहदेव अपने को सबसे बड़ा विद्वान समझता था। इसी पाप के कारण उसको गिरना पड़ा।

पढ़ें :- 14 अप्रैल 2021 का राशिफल: इन जातकों पर होगी भगवान श्रीगणेश की कृपा, जानिए अपनी राशि का हाल

फिर गिरे नकुल

मार्ग में नकुल के गिरने पर युधिष्ठिर ने कहा कि नकुल को अपने रूप पर बेहद घमंड था। इसलिए आज उसकी यह हालत हुई है।

फिर गिरे अर्जुन

अर्जुन के गिरने पर जब भीम ने पूछा तब युधिष्ठिर ने कहा कि अर्जुन को अपने पराक्रम पर बेहद अभिमान था। वह बोलता था कि मैं एक ही दिन में दुश्मनों का ख़ात्मा कर दूंगा। किन्तु वह ऐसा न कर सका। अर्जुन की आज यह स्थिति इसी के कारण हुई है। ऐसा कहकर बिना पीछे देखे युधिष्ठिर आगे बढ़ गए।

सबसे आखिर में गिरे भीम

मार्ग में जब सबसे आखिर में भीम भी गिर पड़े तो उन्होंने अपने भी गिरने की वजह युधिष्ठिर से पूछी। भीम के पूछने पर युधिष्ठिर ने कहा कि तुम खाते बहुत थे तथा अपनी ताकत का झूठा प्रदर्शन भी करते थे। इसलिए तुम्हें आज भूमि पर गिरना पड़ा। भीम को यह बात कहकर युधिष्ठिर कुत्ते के साथ आगे बढ़ गए।

करवाल युधिष्ठिर ही गए थे सशरीर स्वर्ग

पढ़ें :- कर्ज से निजात पाने के लिए नवरात्रि में करें ये उपाय, जल्द मिलेगा छुटकारा

द्रौपदी समेत अन्य पांडवों के मार्ग में गिरने के पश्चात् युधिष्ठिर जैसे ही कुछ दूर आगे चले थे कि खुद देवराज इन्द्र अपना रथ लेकर युधिष्ठिर को लेने आ गए। इस पर युधिष्ठिर ने कहा कि द्रौपदी और मेरे भाई मार्ग में गिर गए हैं। आप ऐसा इंतजाम कीजिए कि वे सब भी मेरे साथ चलें। इस पर इंद्र ने कहा कि वे सब पहले ही शरीर त्याग कर स्वर्ग पहुंच चुके हैं तथा आपको सशरीर स्वर्ग जाना है।

द्रौपदी एवं अपने भाइयों के बारे में इंद्र की बात सुनकर युधिष्ठिर ने बताया कि यह कुत्ता मेरा परम भक्त है तथा इसे भी मेरे साथ स्वर्ग चलने की अनुमति दीजिए। तब इंद्र ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। किन्तु जब युधिष्ठिर नहीं माने तब कुत्ते का रूप धारण किए यमराज ने अपने वास्तविक रूप को दिखाया। इस प्रकार युधिष्ठिर को अपने धर्म में स्थित देखकर यमराज बेहद खुश हुए तथा देवराज इंद्र युधिष्ठिर को सशरीर अपने रथ में बैठाकर स्वर्ग ले गए।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...