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आखिर किसके लिए संदेश है जितिन प्रसाद का प्रमोशन?

After All Who Is The Message For Jitin Prasad

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ: पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव और इसे और ज्यादा सजीव बनाने के लिए पत्र लिखा था। यूपी में इसको लेकर कुछ नेताओं ने विरोध भी किया था। हालांकि, जब शुक्रवार को केंद्रीय नेतृत्व ने बदलाव किया तो जितिन को प्रमोशन देकर यह साफ कर दिया कि उनके पत्र को सकारात्मक तौर पर लिया गया है। ऐसे में प्रदेश संगठन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह संदेश किसके लिए है? उनके लिए जिन्होंने जितिन के खिलाफ प्रदर्शन करवाया था?

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पत्र में पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग की गई थी। साथ ही, संगठन को जीवंत बनाने की योजनाओं पर काम करने के लिए कहा गया था। इसके बाद लखीमपुर-खीरी में पूर्व सांसद जफर अली नकवी की मौजूदगी में जितिन के खिलाफ नारेबाजी हुई और जिला कांग्रेस कमिटी ने उन्हें पार्टी से निकालने और कार्रवाई करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया था। मौजूदा जिला अध्यक्ष का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूपी के सह प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने प्रस्ताव बनाकर भेजा था और उस पर दस्तखत करने को कहा था।

इस सारे मामले में जितिन तो चुप्पी साधे रहे थे, लेकिन उनके समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल खुलकर आए थे। नसीहत देते हुए उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को जितिन के खिलाफ नहीं बल्कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए। जितिन का यह विरोध तब हुआ था जबकि इस पत्र पर कांग्रेस वर्किंग कमिटी में भी चर्चा हो चुकी थी और नेताओं के सुझावों को मान लिया गया था। शुक्रवार को हुए फेरबदल यह नजर भी आया।

जितिन को प्रभारी बनाए जाने के पीछे की एक वजह उनका पश्चिम बंगाल कनेक्शन भी है। जितिन की परदादी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी थीं। बंगाल में चूंकि चुनाव होने हैं लिहाजा, जितिन के पास यह कहने का मौका होगा कि वह राज्य के लिए बाहरी नहीं हैं।

कांग्रेस कमिटी पर मुस्लिम नेताओं ने सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व स्टेट को-ऑर्डिनेटर मोहम्मद नासिर ने कहा है कि केंद्रीय कमिटी में कोई भी नया मुस्लिम चेहरा शामिल नहीं है। यूपी से एक भी कार्यकर्ता को जगह नहीं दी गई है। इससे पहले यूपी की कमिटी के विस्तार में भी शिया समुदाय को हाशिये पर ही रखा गया था।

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बीते काफी समय से जितिन प्रसाद ब्राह्मणों के हक में आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, प्रदेश नेतृत्व से उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा था। यही वजह थी कि जब जितिन ने ब्रह्म चेतना सवांद कार्यक्रम की घोषणा की तो पार्टी ने इससे किनारा कर लिया। कई नेताओं ने यह तक कहा कि वह उनका अपना निजी मसला है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन शुक्रवार की कमिटी में जिस तरह से ब्राह्मणों को तरजीह दी गई है, उससे यह माना जा रहा है कि पार्टी अब सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर और आगे बढ़ सकती है।

जितिन के अलावा पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी को भी आगे किया गया है। प्रमोद लंबे अरसे के बाद किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उनकी गतिविधियां भी बीते दिनों से कुछ कम थीं। हालांकि, अब शीर्ष कांग्रेस कमिटी में जगह दी गई है तो उसके सकारात्मक नतीजे मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। प्रमोद तिवारी की सक्रियता कांग्रेस के मिशन 2022 को मजबूती दे सकती है।

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