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कोरोना संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ा, दवा और इंजेक्शन की शुरू हुआ कालाबाजारी

कोरोना संक्रमित रोगियों के सही होने के बाद ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रह है। ब्लैक फंगस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सतकर्ता बरती जा रही है। वहीं, राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दी जा रही अम्फोटेरीसीन बी नामक इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है।

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमित रोगियों के सही होने के बाद ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रह है। ब्लैक फंगस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सतकर्ता बरती जा रही है। वहीं, राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दी जा रही अम्फोटेरीसीन बी नामक इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है।

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बताया जा रहा है कि अब इसकी भी कालाबाजारी शुरू हो गयी है। एक इंजेक्शन करीब 12 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। पहले रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी के बाद अब अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि राजधानी के तीन अस्पताल एम्स, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और सर गंगाराम अस्पताल को मिलाकर 100 से ज्यादा मरीज उपचाराधीन हैं। वहीं, अब इनकी दवा के लिए जो इंजेक्शन का प्रयोग हो रहा है, वह अब बाजार से गायब हो चुका है। ऐसे में ब्लैक फंगस की दवा को लेकर भी कालाबाजारी शुरू हो गयी है।

 

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