दिमित्री मेदवेदेव के इस्तीफे के बाद रूस की संसद ने पुतिन के करीबी मिशुस्तिन को नया PM चुना

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दिमित्री मेदवेदेव के इस्तीफे के बाद रूस की संसद ने पुतिन के करीबी मिशुस्तिन को नया PM चुना

नई दिल्ली। रूस की संसद ने राष्ट्रपति पुतिन के करीबी मिखाइल वी मिशुस्तिन को देश का नया प्रधानमंत्री चुना है। कई प्रमुख विभागों में शीर्ष पर रह चुके मिशुस्तिन अब तक रूस की राजनीति में अनजान चेहरा थे। बुधवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनका नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था।

After Dmitry Medvedevs Resignation Russias Parliament Selected Mishustin A Close Aide Of Putin As The New Pm :

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को ही रूस के संविधान में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया था कि देश में राजनीतिक ताकतों का बंटवारा ज्यादा बेहतर तरीके से किया जाएगा। यह शक्तियां राष्ट्रपति से लेकर संसद, राज्य परिषद और अन्य सरकारी संस्थानों को भी दी जाएंगी।

मिशुत्सिन रूस की फेडरल टैक्स सर्विस के प्रमुख रह चुके हैं। उन्हें अर्थव्यवस्था मामलों का जानकार माना जाता है। रूस की संसद डुमा में गुरुवार को मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री चुनने के लिए वोटिंग हुई। इसमें उनके पक्ष में 424 में से 383 वोट पड़े। कम्युनिस्ट पार्टी के 41 सांसद वोटिंग के दौरान गैरमौजूद रहे। पुतिन ने बाद में औपचारिक तौर पर मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।

पुतिन के इस ऐलान के बाद उनके करीबी साथी दिमित्री मेदवेदेव और उनकी पूरी कैबिनेट ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। मेदवेदेव पुतिन के काफी भरोसेमंद साथी रहे हैं। 2008 में पुतिन को संवैधानिक वजहों से राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था (रूस में तब कोई व्यक्ति अधिकतम 2 बार राष्ट्रपति रह सकता था)। तब मेदवेदेव ने पुतिन के लिए प्रधानमंत्री पद छोड़ा और उन्हीं के कहने पर राष्ट्रपति बने। 2012 में मेदवेदेव सरकार ने कानून बदल कर राष्ट्रपति बनने की सीमा को खत्म कर दिया। इसी के साथ पुतिन राष्ट्रपति पद पर वापस लौटे थे।

मेदवेदेव 1990 में राजनीति में उतरे थे, तब उन्होंने पुतिन के साथ काफी करीब से काम किया। रूस की राजनीति के जानकारों का कहना है कि पुतिन 2024 में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने संविधान में कुछ अहम बदलाव का फैसला किया। अभी यह साफ नहीं है कि वो किस तरह के बदलाव करने वाले हैं। खास बात यह है कि मेदवेदेव के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद पुतिन ने उन्हें रूस सुरक्षा परिषद का डिप्टी चेयरमैन नियुक्त कर दिया। मेदवेदेव आने वाले समय में पुतिन के सलाहकार के तौर पर उनके साथ जुड़े रहेंगे।

नई दिल्ली। रूस की संसद ने राष्ट्रपति पुतिन के करीबी मिखाइल वी मिशुस्तिन को देश का नया प्रधानमंत्री चुना है। कई प्रमुख विभागों में शीर्ष पर रह चुके मिशुस्तिन अब तक रूस की राजनीति में अनजान चेहरा थे। बुधवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनका नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था। राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को ही रूस के संविधान में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया था कि देश में राजनीतिक ताकतों का बंटवारा ज्यादा बेहतर तरीके से किया जाएगा। यह शक्तियां राष्ट्रपति से लेकर संसद, राज्य परिषद और अन्य सरकारी संस्थानों को भी दी जाएंगी। मिशुत्सिन रूस की फेडरल टैक्स सर्विस के प्रमुख रह चुके हैं। उन्हें अर्थव्यवस्था मामलों का जानकार माना जाता है। रूस की संसद डुमा में गुरुवार को मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री चुनने के लिए वोटिंग हुई। इसमें उनके पक्ष में 424 में से 383 वोट पड़े। कम्युनिस्ट पार्टी के 41 सांसद वोटिंग के दौरान गैरमौजूद रहे। पुतिन ने बाद में औपचारिक तौर पर मिशुत्सिन को प्रधानमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। पुतिन के इस ऐलान के बाद उनके करीबी साथी दिमित्री मेदवेदेव और उनकी पूरी कैबिनेट ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। मेदवेदेव पुतिन के काफी भरोसेमंद साथी रहे हैं। 2008 में पुतिन को संवैधानिक वजहों से राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था (रूस में तब कोई व्यक्ति अधिकतम 2 बार राष्ट्रपति रह सकता था)। तब मेदवेदेव ने पुतिन के लिए प्रधानमंत्री पद छोड़ा और उन्हीं के कहने पर राष्ट्रपति बने। 2012 में मेदवेदेव सरकार ने कानून बदल कर राष्ट्रपति बनने की सीमा को खत्म कर दिया। इसी के साथ पुतिन राष्ट्रपति पद पर वापस लौटे थे। मेदवेदेव 1990 में राजनीति में उतरे थे, तब उन्होंने पुतिन के साथ काफी करीब से काम किया। रूस की राजनीति के जानकारों का कहना है कि पुतिन 2024 में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने संविधान में कुछ अहम बदलाव का फैसला किया। अभी यह साफ नहीं है कि वो किस तरह के बदलाव करने वाले हैं। खास बात यह है कि मेदवेदेव के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद पुतिन ने उन्हें रूस सुरक्षा परिषद का डिप्टी चेयरमैन नियुक्त कर दिया। मेदवेदेव आने वाले समय में पुतिन के सलाहकार के तौर पर उनके साथ जुड़े रहेंगे।