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पीएफ घोटाले के बाद सूचना विभाग में एलईडी वैन लगाने में हुई धांधली, फर्जी दस्तावेजों से हासिल किया टेंडर

After Pf Scam Rigging In Setting Up Led Van In Information Department Tender Obtained From Fake Documents

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले के बाद अब सूचना विभाग में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रचार—प्रसार के लिए चलाई जाने वाली एलईडी वैन में यह घोटाला हुआ है। फर्जी दस्तावों से टेंडर पाने के लिए छह फर्मों ने धोखाधड़ी की है। फर्मों से 2017—18 के लिए टेंडर हुआ था। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सूचना विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हंसराज ने हजरतगंज कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।

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इंस्पेक्टर हजरतगंज राधा रमण सिंह के मुताबिक, वर्ष 2017—18 में सूचना विभाग ने सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए एलईडी वैन किराये पर लेने के लिए टेंडर निकाला था। इसमें शर्त थी कि एलईडी वाहन फर्म अथवा किराये पर अनुबंध होना चाहिए। बावजूद इसके श्रीमंत कक्सा पब्लिसिटी प्रा.लि. श्रीमंत फिस्कान मीडिया, श्रीमंत खेंसा एडवरटाइजिंग, श्रीमंत एडमायर पब्लिसिटी, श्रीमंत मीडिया लॉजिक्स और श्रीमंत मातेश्वरी इंटरप्राइजेज ने विभाग के साथ ​फर्जीवाड़ा किया।

​आरोप है कि इन कंपनियों ने जाली दस्तावेजों के जरिए यह काम किया। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद शासन ने सभी कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद गुरुवार रात हजरतगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। देर रात पुलिस ने इंदिरानगर निवासी सगे भाई अतुल और अमित शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया है।

एम परिवहन एप के जरिए हुआ खुलासा
डिप्टी डायरेक्टर हंसराज ने पुलिस को बताया कि, ठेका देने के बाद वाहनों के बारे में चेक किया गया तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सूत्रों की माने तो आरोपियों ने जिस एलईडी वैन का नंबर सूचना विभाग को दिया था वह स्कूटर और टेंपों के नंबर थे। सूचना ​विभाग को इसकी जानकारी हुई तो विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद आनन—फानन में हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।

जांच हुई तो फसेंगे विभाग के कई अधिकारी
सूत्रों का कहना है ​कि पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई अहम जानकारी पुलिस को दी है। इसमें विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सूत्रों की माने तो पुलिस जल्द ही उनसे भी पूछताछ करेगी। बताया जा रहा है कि विभाग के कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ में यह जानकारी की जायेगी कि उन्होंने कहीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए यह टेंडर दिलाने में अहम भूमिका तो नहीं निभाई है।

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