श्रीलंका के बाद अब इस देश में लगा हिजाब पर बैन

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श्रीलंका के बाद अब इस देश में लगा हिजाब पर बैन

नई दिल्ली। श्रीलंका में हुए बम धमाके के बाद वहां हिजाब को लेकर सख्त कानून बनाते हुए हिजाब को बैन कर दिया गया। अब ऑस्ट्रिया के प्राथमिक स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का कानून पारित हो गया है। सत्ताधारी दक्षिणपंथी सरकार ने यह प्रस्ताव पेश किया था। मुस्लिम विरोधी होने के आरोप से बचने के लिए इस कानून में सीधे तौर पर इस्लाम या हिजाब का नाम नहीं लिया गया है।

After Sri Lanka In This Country Hijab Is Banned :

वहीं, सरकार में शामिल दोनों दलों के प्रतिनिधि मान रहे हैं कि यह कानून हिजाब पर प्रतिबंध के लिए बनाया गया है। कानून में सिर को ढंकने वाला कोई भी वस्त्र जो किसी विचारधारा या धार्मिकता से प्रभावित हो, उसे प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालांकि सिख बच्चों द्वारा पहने जाने वाले ‘पटका’ और यहूदियों के ‘किप्पा’ को इससे बाहर रखा गया है।

इतना ही नहीं, ऑस्ट्रिया में पीपुल्स पार्टी और फ्रीडम पार्टी ऑफ ऑस्ट्रिया के गठबंधन की सरकार है। दोनों के प्रवक्ताओं ने कानून को सीधे तौर पर राजनीतिक इस्लाम के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि लड़कियों को दमन से बचाने के लिए यह जरूरी है। वहीं, मुस्लिम संगठन आइजीजीओई ने आलोचना करते हुए कानून को विभाजनकारी बताया है।

नई दिल्ली। श्रीलंका में हुए बम धमाके के बाद वहां हिजाब को लेकर सख्त कानून बनाते हुए हिजाब को बैन कर दिया गया। अब ऑस्ट्रिया के प्राथमिक स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का कानून पारित हो गया है। सत्ताधारी दक्षिणपंथी सरकार ने यह प्रस्ताव पेश किया था। मुस्लिम विरोधी होने के आरोप से बचने के लिए इस कानून में सीधे तौर पर इस्लाम या हिजाब का नाम नहीं लिया गया है। वहीं, सरकार में शामिल दोनों दलों के प्रतिनिधि मान रहे हैं कि यह कानून हिजाब पर प्रतिबंध के लिए बनाया गया है। कानून में सिर को ढंकने वाला कोई भी वस्त्र जो किसी विचारधारा या धार्मिकता से प्रभावित हो, उसे प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालांकि सिख बच्चों द्वारा पहने जाने वाले 'पटका' और यहूदियों के 'किप्पा' को इससे बाहर रखा गया है। इतना ही नहीं, ऑस्ट्रिया में पीपुल्स पार्टी और फ्रीडम पार्टी ऑफ ऑस्ट्रिया के गठबंधन की सरकार है। दोनों के प्रवक्ताओं ने कानून को सीधे तौर पर राजनीतिक इस्लाम के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि लड़कियों को दमन से बचाने के लिए यह जरूरी है। वहीं, मुस्लिम संगठन आइजीजीओई ने आलोचना करते हुए कानून को विभाजनकारी बताया है।