1. हिन्दी समाचार
  2. अयोध्या राम मंदिर फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर डाली गयी याचिका

अयोध्या राम मंदिर फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर डाली गयी याचिका

After The Ayodhya Ram Temple Verdict A Petition Was Filed In The Supreme Court On The Kashi Mathura Dispute

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर विवाद को लेकर कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और आखिरकार बीते वर्ष रमलला के पक्ष में फैसला सुनाया गया। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर याचिका दायर की गई है। इस याचिका में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को चुनौती दी गई है।

पढ़ें :- पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

हिंदी पुजारियों के संगठन विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में काशी व मथुरा विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। करीब 29 साल बाद एक्ट को रद्द करने की मांग की गई है।

आपको बता दें कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 एक्ट में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा। हालांकि अयोध्या विवाद को इससे बाहर रखा गया क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले का चल रहा था। याचिका में कहा गया है कि इस एक्ट को कभी चुनौती नहीं दी गई और ना ही किसी कोर्ट ने न्यायिक तरीके से इस पर विचार किया जाए।

गौरतलब है कि अयोध्या फैसले में भी संविधान पीठ ने इस पर सिर्फ टिप्पणी की थी। 9 नवंबर 2019 में राम मंदिर पर फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने देश के तमाम विवादित धर्मस्थलों पर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र किया है। इस मतलब ये हुआ कि काशी और मथुरा में जो मौजूदा स्थिति है वही बनी रहेगी। उनको लेकर किसी तरह का दावा नहीं किया जा सकेगा।

पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991. एक अधिनियम जो 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए हुए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को एक आस्था से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने और किसी स्मारक के धार्मिक आधार पर रखरखाव पर रोक लगाता है। यह केंद्रीय कानून 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था।

पढ़ें :- बिहार चुनाव: जेडीयू में इस तरह से मिल रहा है टिकट, पहले चरण के प्रत्याशियों पर मंथन

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे...