गोरखपुर के बाद कुशीनगर में लापरवाई- जिंदा रहते नहीं मिली ऑक्सीजन, मरने के बाद मिला बेड

कुशीनगर। यूपी का स्वास्थ्य महकमा सुधरने का नाम लेता नजर नहीं आ रहा। गोरखपुर मेडिकल कालेज में डाक्टरों की लापरवाई से हुई 35 बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वे प्रदेश में लापरवाई से होने वाली एक भी जनहानि बर्दाश्त नहीं करेंगे। सीएम के तेवरों से जाहिर था कि वे प्रदेश भर के डाक्टरों को चेतावनी दे रहे थे। इस चेतावनी को एक सप्ताह ही बीता कि गोरखपुर से सटे कुशीनगर में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाई की नई घटना सामने आ गई। जहां डाक्टरों की लापरवाई का शिकार हुई मृतका के परिजनों का आरोप है कि प्राथमिक स्वस्थ केंद्र पर आॅक्सीजन नहीं होने की बात कहकर मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया था। मरीज को जिस एंबुलेंस से भेजा गया उसमें भी आॅक्सीजन न​हीं थी। अंत में जिला अस्पताल में भी समय रहते उनके मरीज को इलाज और आॅक्सीजन नहीं दिया गया।

मामला कुशीनगर की खड्डा तहसील के गांव पकड़ी का है। यहां के रहने वाले बृजभान की पत्नी गंगाजली की तबीयत बुधवार को देर शाम अचानक खराब हो गई। उसको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। घबराए परिजन उसे सीएचसी खड्डा ले गए लेकिन डॉक्टर ने अस्पताल में ऑक्सीजन का सिलेंडर न होने की बात कहकर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

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परिजनों ने बताया कि जिला अस्पताल ले जाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध हुई लेकिन उसमें भी ऑक्सीजन का सिलेंडर नहीं था। किसी तरह मरीज जिला अस्पताल तो पहुंच गया लेकिन वहां भी समय रहते ऑक्सीजन न मिलने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई। परिजनों ने इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों के सामने मदद के लिए हाथ जोड़े लेकिन हास्पिटल स्टॉफ ने मरीज की सुध नहीं ली।

परिजनों का आरोप है कि उनके मरीज ने अस्पताल के फर्श पर ही दम तोड़ दिया। जब डॉक्टरों को इस बात का एहसास हुआ कि मरीज की मौत हो गई तो उन्होंने आनन फानन में मरीज को बेड पर लिटाया। औपचारिक उपचार करके मरीज को मृत घोषित कर दिया गया।

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इस विषय में जब जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. लालता प्रसाद ने बात की गई तो उनकी ओर से रटा रटाया जवाब सामने आया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में 100 बैड हैं, जबकि 175 मरीज भर्ती हैं। इसलिए थोड़ी बहुत कमी रह जाती है। मामला संज्ञान मे आया है स्टॉफ के जो लोग दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।