ट्रिपल तलाक के बाद आरक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी में मोदी सरकार

ट्रिपल तलाक के बाद आरक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी में मोदी सरकार

नई दिल्ली। तीन दशक पूर्व 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई की सिफारिश पर गठित हुए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 1990 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह द्वारा लागू किए गए 27 फीसदी आरक्षण का लाभ ओबीसी को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। मोदी सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के स्थान पर बनाए गए नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज (एनसीबीसी) की रिपोर्ट में सामने आया है कि मंडल कमीशन के लागू होने के 26 साल बाद भी ओबीसी वर्ग से आने वाले लोगों की केन्द्र सरकार की नौकरियों में भागीदारी आरक्षित संख्या की आधी भी नहीं है। जो कमीशन की शिफारिशों के साथ अन्याय करता नजर नहीं आता। वर्तमान व्यवस्था का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिल सके इसके लिए केन्द्र सरकार ने तैयारी करना शुरू कर दी है। जिसे ट्रिपल तलाक के बाद केन्द्र सरकार के अगले मिशन के रूप में देखा जा रहा है।

एक खबरिया रिर्पोट के मुताबिक केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि केन्द्र सरकार के तहत ग्रुप ए, बी, सी और डी में 79,483 कर्मचारी सेवारत हैं। जिनमें ओबीसी कर्मचारियों की संख्या 9,040 है, जोकि कुल कर्मचारियों की संख्या का 11.37 प्रतिशत होता है। केन्द्रीय मंत्रालय में कार्यरत कर्मचारियों के आंकड़े आरक्षण व्यवस्था पर और भी गंभीर सवाल उठाते हैं। मंत्रालयों के कार्यरत 6,879 कर्मचारियों में 12.91 प्रतिशत दलित, 6.7 प्रतिशत ओबीसी और 4 प्रतिशत जनजातीय वर्ग से आते हैं।

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इन आंकड़ों के आधार बनाकर तैयार की गई रिपोर्ट में एनसीबीसी ने कहा है कि 26 सालों में मंडल कमीशन के आधार पर लागू की गई आरक्षण व्यवस्था का लाभ ओबीसी के तहत आने वाले लोगों को नहीं मिल पाया है। आरक्षण के नाम पर कुछ विशेष जातियों को लगातार लाभ पहुंचाया गया है, जबकि कई ऐसी जातियां हैं जिन्हें आरक्षण के लाभ से दूर रखा गया।

सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एनसीबीसी को एक ऐसी व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने को कहा है, जिससे आरक्षण व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों को दूर कर वंचित जातियों को अार्थिक रूप से स​शक्त बनाया जा सके। इसके साथ ही ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि सरकार ने पिछड़ी जाति से आने वाले ऐसे लोगों की एक क्रीमी लेयर को परिभाषित करने को कहा है जिनकी वार्षिक आय 7 से 8 लाख प्रतिवर्ष या इससे अधिक है।

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इसके अलावा सरकार ने आरक्षण व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करने के लिए एनसीबीसी को पिछड़ी जातियों को तीन श्रेणियों में बांटने को कहा है। इस प्रक्रिया में वंचित जातियों को विशेष श्रेणी में डाला जा सकता है।

आपको बता दें कि केन्द्र सरकार आरक्षण व्यवस्था में समय समय पर सामने आने वाली विसंगतियों को दूर करने के लिए संशोधन करती रही है। मोदी सरकार ने 2015 में एक बड़ा फैसला लेते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग को खत्म करते हुए उसकी जगह नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज (NCBC) का गठन किया था।

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