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आगरा: कोर्ट में सिपाही की वर्दी उतरवाने पर जज का हुआ ट्रांसफर

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By रवि तिवारी 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगरा की जिला अदालत में एक जज का इसलिए तबादला कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी को वर्दी उतारने और कोर्ट में एक घंटे तक खड़े रहने के आदेश दिए थे। मामला शनिवार का है, बताया जा रहा है कि ऐसी खबरें आने के कुछ घंटों बाद ही जज का तबादला कर दिया गया।

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दोपहर में यूपी पुलिस ने ट्वीट किया, ‘डीजीपी यूपी ओपी सिंह ने कोर्ट द्वारा कांस्टेबल की वर्दी उतारने के आदेश को गंभीरता से लिया है और इस मुद्दे को उचित जगह उठाया। हम प्रत्येक पुलिसकर्मी की गरिमा के साथ खड़े हैं और समाज के सभी वर्गों से सुरक्षाबलों का सम्मान करने की अपील करते हैं।’ इसके कुछ घंटे बाद ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज के तबादले के आदेश जारी कर दिए। हालांकि, जज की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह है मामला

मामले के अनुसार पुलिस लाइन से वज्र वाहन लेकर शुक्रवार की सुबह कांस्टेबल चालक घूरेलाल, कांस्टेबल राजेश कुमार, आलोक भारती और मनीष कुमार जिला जेल पहुंचे थे। वहां से दो किशोरों को लेकर वे मलपुरा के सिरौली स्थित किशोर न्याय बोर्ड जा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे वज्र वाहन ग्वालियर रोड से सिरौली जाने वाली लिंक रोड पर चल रहा था। तभी पीछे मजिस्ट्रेट की गाड़ी पहुंच गई। उनकी गाड़ी ने हॉर्न के साथ ही हूटर और सायरन भी बजाया, मगर करीब दो किलोमीटर दूरी तक उन्हें वज्र वाहन से साइड नहीं मिली। इस पर मजिस्ट्रेट को गुस्सा आ गया, अपनी कोर्ट पहुंचते ही उन्होंने वज्र वाहन के चालक घूरेलाल को तलब कर लिया।

घूरेलाल का आरोप है कि मजिस्ट्रेट ने एसएसपी से बात करके नौकरी से निकलवाने की धमकी दी। इसके बाद टोपी, बेल्ट निकालकर वर्दी उतारने को कहा। डरे-सहमे घूरेलाल ने अपनी वर्दी उतार दी। अन्य पुलिसकर्मी और कोर्ट में मौजूद कर्मचारी कुछ न बोल सके। करीब 30 मिनट तक सिपाही उसी हालत में खड़ा रहा। किसी ने 11.59 बजे यूपी 100 पर कॉल करके घटना की सूचना दी। इसके बाद यूपी 100 की पीआरवी 46, चीता मोबाइल और एसओ मलपुरा महेश यादव पहुंचे। थोड़ी देर में सीओ अछनेरा नम्रता श्रीवास्तव भी पहुंचीं। तब तक मजिस्ट्रेट कोर्ट से उठ चुके थे। सीओ ने सिपाही को वर्दी पहनवाई।

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