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पीएम मोदी के जन्मदिन पर कृषि मंत्री हरसिमरत कौर ने दिया इस्तीफा, सरकार पर लगाया किसान विरोधी आरोप

By सोने लाल 
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नई दिल्ली: एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ता अपने मुखिया व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 70 वें जन्मदिन के मौके पर जश्न मना रहे थे वहीं, दूसरी ओर संसद में प्रस्तावित कृषि विधेयकों पर मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। कृषि बिल पर एनडीए में फूट पड़ गई है। कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने सरकार से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले लोकसभा में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने बिल के विरोध में चेतावनी देते हुए ऐलान किया था कि केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल कृषि संबंधी विधेयकों के विरोध में सरकार से इस्तीफा देंगी।

गुरुवार को जब बिल को लोकसभा में पेश किया गया तो शिरोमणि अकाली दल के सांसद सुखबीर सिंह बादल ने विरोध किया। उन्होंने सरकार को बड़ा झटका देते हुए कहा कि हरसिमरत कौर बादल मंत्रीपद से इस्तीफा देंगी। हालांकि, शिरोमणि अकाली दल का सरकार को समर्थन जारी रहेगा। बता दें कि हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं। इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी, उन्होंने कहा कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है। इससे पहले सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की सदस्य और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल सरकार से इस्तीफा देंगी। हमने ये फैसला बिल के विरोध में लिया है। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि हम इस बिल का विरोध करते हैं। इससे 20 लाख किसानों पर असर पड़ेगा।

आजादी के बाद हर राज्य ने अपनी योजना बनाई, पंजाब की सरकार ने पिछले 50 साल खेती को लेकर कई काम किए, पंजाब में किसान खेती को अपना बच्चा समझता है। पंजाब अपना पानी देशवासी को कुर्बान कर देता है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को एनडीए गठबंधन छोड़ने की चुनौती दी थी। गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि बादल परिवार अब भी सरकार के साथ चिपके हुए हैं, जबकि मोदी सरकार किसानों के खिलाफ बिल ला रही है। ऐसे में शिरोमणि अकाली दल के नौटंकी से पंजाब के किसानों का नुकसान वापस नहीं होगा, जो उन्होंने पहले किया है।

कृषि अध्यादेश को लेकर ज्यादातर राजनीतिक दल किसानों के समर्थन में हैं। कांग्रेस और पंजाब सरकार किसानों के साथ है। शिरोमणि अकाली दल भी इस मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ी है। एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद अकाली दल ने कृषि अध्यादेशों से जुड़े बिल पर सरकार का विरोध करने का ऐलान किया है।कृषि मंत्री ने दिया किसानों को भरोसाइससे पहले गुरुवार को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक, 2020 और कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया।

कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयक के फायदे गिनाए और बताया कि ये किसानों के लाभ के लिए हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये विधेयक खेती को मुनाफे में लाने वाले, किसानों को आजादी दिलाने वाले हैं। इस विधेयक से किसानों को अपनी उपज किसी भी स्थान से किसी भी व्यक्ति को बेचने का अधिकार होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे निजी निवेश गांव तक पहुंचेगा और रोजगार बढ़ेगा। किसान अच्छी फसलों की तरफ आकृषित होगा। कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

गौरतलब है कि अभी हाल ही में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर भारत के जहां 20 सैनिक शहीद हुए। इस दौरान मोदी सरकार ने न केवल चाइना के एप को देश में बैन किया बल्कि कई चीजों पर प्रतिबन्ध लगाया। आरोप है कि इसी बीच मोदी सरकार ने चीन से 9000 हजार करोड़ का कर्ज लिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि दुश्मन देश से मोदी सरकार को क्यों लोन लेना पड़ रहा है? आखिर इसका कौन जवाबदेही है?

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