Air India ने स्वतंत्रा दिवस पर ऐसे रचा इतिहास, जानें क्या हुआ खास

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Air India ने स्वतंत्रा दिवस पर ऐसे रचा इतिहास, जानें क्या हुआ खास

नई दिल्ली। इस स्वतंत्र दिवस पर एयर इंडिया ने रचा इतिहास और बन गई भारत की पहली North Pole से गुजरने वाली पहली एयरलाइन। एयर इंडिया के बोईंग-777 एयरक्राफ्ट ने कल यानी 15 अगस्‍त को उत्‍तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरी। एयर इंडिया के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। बताया जाता है कि यह रास्ता सैन फ्रांसिस्को जाने वाले सामान्य रास्ते के मुकाबले छोटा किंतु बेहद चुनौतीपूर्ण है। भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए भी उपलब्धि ऐतिहासिक है।

Air India Created History On Independence Day Know What Happened :

दरअसल, दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को की फ्लाइट AI-173 सुबह चार बजे 243 यात्रियों के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, रूस के ऊपर से उड़कर 12.27 बजे नॉर्थ पोल से गुजरी। इस कीर्तिमान के साथ एयर इंडिया अमेरिका के लिए तीनो रूटों का इस्तेमाल करने वाली विश्व की पहली एयरलाइन बन गई। अभी मध्य पूर्व में केवल एतिहाद एयरलाइन ही अमेरिका जाने के लिए उत्तरी ध्रुव के रास्ते का इस्तेमाल करती है।

वहीं, एक्सट्रीम ग्रेविटी होने के कारण दिशा की सही जानकारी देने वाले चुंबकीय कंपास भी उत्‍तरी ध्रुव के ऊपर काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में विमान में लगे अत्याधुनिक उपकरण और जीपीएस से उपलब्‍ध डेटा ही पायलट को उपलब्ध होता है। इसी की मदद से पायलट सही रास्‍ते पर उड़ान भरते रहने का फैसला करते हैं। यही नहीं उत्‍तरी ध्रुव पर तापमान हमेशा माइन दहाई अंकों में होता है। इससे विमान के ईंधन के जमने का खतरा भी होता है।

इतना ही नहीं सौर विकिरण का भी बड़ा खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों की मानें तो उत्तरी ध्रुव के छोटे रास्ते से सैन फ्रांसिस्को की उड़ान में दूरी और समय की बचत के साथ ईधन की बचत भी होगी। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। एयर इंडिया के सूत्रों ने बताया कि उत्तरी ध्रुव के रास्ते उड़ान भरने पर कार्बन उत्सर्जन में 6000-21000 किलोग्राम तक की कमी आने की संभावना है।

नई दिल्ली। इस स्वतंत्र दिवस पर एयर इंडिया ने रचा इतिहास और बन गई भारत की पहली North Pole से गुजरने वाली पहली एयरलाइन। एयर इंडिया के बोईंग-777 एयरक्राफ्ट ने कल यानी 15 अगस्‍त को उत्‍तरी ध्रुव के ऊपर से उड़ान भरी। एयर इंडिया के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। बताया जाता है कि यह रास्ता सैन फ्रांसिस्को जाने वाले सामान्य रास्ते के मुकाबले छोटा किंतु बेहद चुनौतीपूर्ण है। भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए भी उपलब्धि ऐतिहासिक है। दरअसल, दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को की फ्लाइट AI-173 सुबह चार बजे 243 यात्रियों के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, रूस के ऊपर से उड़कर 12.27 बजे नॉर्थ पोल से गुजरी। इस कीर्तिमान के साथ एयर इंडिया अमेरिका के लिए तीनो रूटों का इस्तेमाल करने वाली विश्व की पहली एयरलाइन बन गई। अभी मध्य पूर्व में केवल एतिहाद एयरलाइन ही अमेरिका जाने के लिए उत्तरी ध्रुव के रास्ते का इस्तेमाल करती है। वहीं, एक्सट्रीम ग्रेविटी होने के कारण दिशा की सही जानकारी देने वाले चुंबकीय कंपास भी उत्‍तरी ध्रुव के ऊपर काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में विमान में लगे अत्याधुनिक उपकरण और जीपीएस से उपलब्‍ध डेटा ही पायलट को उपलब्ध होता है। इसी की मदद से पायलट सही रास्‍ते पर उड़ान भरते रहने का फैसला करते हैं। यही नहीं उत्‍तरी ध्रुव पर तापमान हमेशा माइन दहाई अंकों में होता है। इससे विमान के ईंधन के जमने का खतरा भी होता है। इतना ही नहीं सौर विकिरण का भी बड़ा खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों की मानें तो उत्तरी ध्रुव के छोटे रास्ते से सैन फ्रांसिस्को की उड़ान में दूरी और समय की बचत के साथ ईधन की बचत भी होगी। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। एयर इंडिया के सूत्रों ने बताया कि उत्तरी ध्रुव के रास्ते उड़ान भरने पर कार्बन उत्सर्जन में 6000-21000 किलोग्राम तक की कमी आने की संभावना है।