मंत्री जी के गनर ने ही ली होती बंदूक से जान, बाल-बाल बचे यूपी के ये मंत्री

लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां एक तरफ वीवीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए प्रयासरत है वहीं इन्ही के मंत्री व विधायक इसे बढ़ावा देने पर लगे हैं। इसका ताजा प्रमाण देखने को मिला लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में, जब योगी सरकार के मंत्रीजी वीआईपी ट्रीटमेंट कराने अस्पताल पहुंचे। जहां छोटी सी चूक की वजह से बड़ा हादसा होते-होते टल गया हालांकि इस चूक की वजह से 25 लाख का नुकसान हो गया। दरअसल, खादी…

लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां एक तरफ वीवीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए प्रयासरत है वहीं इन्ही के मंत्री व विधायक इसे बढ़ावा देने पर लगे हैं। इसका ताजा प्रमाण देखने को मिला लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में, जब योगी सरकार के मंत्रीजी वीआईपी ट्रीटमेंट कराने अस्पताल पहुंचे। जहां छोटी सी चूक की वजह से बड़ा हादसा होते-होते टल गया हालांकि इस चूक की वजह से 25 लाख का नुकसान हो गया।



दरअसल, खादी ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी गुरुवार को इलाज़ कराने लोहिया पहुंचे जहां डॉक्टर उन्हे एमआरआई के लिए कक्ष में ले गए। जिसके बाद मंत्रीजी का सुरक्षा गार्ड एमआरआई रूम में बंदूक लेकर घुस गया। सुरक्षाकर्मी के आते ही आफत आ खड़ी हो गयी,एमआरआई मशीन में लगे चुंबक ने बंदूक को खींच लिया। तेज आवाज के साथ मशीन बंद हो गई और मंत्रीजी घबराकर तेजी से रूम से बाहर भागे।



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बताया जा रहा है कि सत्यदेव पचौरी गुरुवार को हरदोई में एक कार्यक्रम के दौरान बेहोश हो गए थे। शाम 7:30 पर उन्हें लोहिया संस्थान में भर्ती करवाया गया। यहां जांच में उनका शुगर लेवल और बीपी लो निकला। शुक्रवार को डॉक्टरों ने उनके सिर का एमआरआई करवाने की सलाह दी। इसके बाद दोपहर 12:30 पर एमआरआई रूम के बाहर पहले बैठे मरीजों को हटा दिया गया।



डॉक्टर मंत्रीजी को जांच के लिए एमआरआई रूम में ले गए और टेबल पर लिटा दिया। इसके बाद मंत्री का गनर बंदूक लेकर अंदर पहुंच गया, जबकि रूम के दरवाजे पर ही मेटल भीतर न ले जाने की चेतावनी लगी हुई। लेकिन गनर ने उसे नजरअंदाज करते हुए कमरे में घुस गया। जांच के लिए मशीन ऑन होते ही उसमें लगा चुंबक प्रभावी हो गया। बंदूक गनर के हाथ से निकल मशीन में फंस गई और तेज आवाज के साथ मशीन बंद हो गई। इससे मंत्रीजी, डॉक्टर व कर्मचारी घबरा गए। मंत्रीजी हड़बड़ाहट में टेबल से उठे और बाहर भाग गए।



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अब भटकेंगे मरीज
संस्थान के डॉक्टर ने बताया कि एमआरआई मशीन 5 करोड़ रुपये की है। इससे रोजाना 30 मरीजों की जांच होती है। वहीं नए मरीजों की जुलाई तक की वेटिंग दी जा रही है। ऐसे में मशीन खराब होने से मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ेगा। एमआरआई की सुविधा सिर्फ केजीएमयू और लोहिया अस्पताल में है। इस कारण लोड काफी है।

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