आर्मी चीफ विपिन रावत पर मौलाना बदरुद्दीन का जवाबी हमला

आर्मी चीफ विपिन रावत पर मौलाना बदरुद्दीन
आर्मी चीफ विपिन रावत पर मौलाना बदरुद्दीन का जवाबी हमला

नई दिल्ली। असम की राजनीतिक पार्टी एआईयूडीएफ के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने आर्मी चीफ विपिन रावत के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि एक आर्मी चीफ को किसी राजनीतिक दल की तरह उनकी पार्टी पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को समर्थन देने के आरोप नहीं लगाने चाहिए। अगर वह सक्षम हैं तो उन्हे बांग्लादेशियों को सीमा पार भेजने के प्रयास करना चाहिए।

Aiudf Chief Maulana Badruddin Attacked Back To Army Chief Vipin Rawat :

बदरुद्दीन ने कहा कि वह केन्द्र सरकार से अपील करते हैं कि एक एक आदमी की जांच की जाए। 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद जो लोग गैरकानूनी रूप से भारत में रहते पाए जाऐं उन्हें बांग्लादेश भेज देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह बेदह अपमानजनक लगता है कि जब आपके ही देश में आपको घुसपैठिया कहा जाए। बार बार आपको बांग्लादेशी कह कर बुलाया जाए। यह तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्ट करे कि कौन बांग्लादेशी है और कौन भारतीय।

उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ ने जिस तरह से एक राजनीतिक बयान देते हुए उनकी पार्टी पर घुसपैठियों को शरण देने के आरोप लगाए है। ऐसा लगता है मानो देश के आर्मी चीफ आरएसएस और बीजेपी की जुबान बोल रहे हों।

आपको बता दें कि पूर्वोत्तर भारत में विदेशी सीमा पर सुरक्षा प्रबंधों को लेकर आयोजित एक संगोष्ठी में सेना के पक्ष को रखते हुए भारतीय सेना के चीफ विपिन रावत ने कहा था कि सीमा से सटे राज्यों में राजनीतिक लाभ के लिए कुछ पार्टियां गैरकानूनी रूप से भारत में घुसने वाले लोगों को शरण दे रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने बदरुद्दीन अजमल द्वारा स्थापित एआईयूडीएफ का उदाहरण दिया था। विपिन रावत ने कहा था कि एआईयूडीएफ एक ऐसी ही तेजी से उभरती पार्टी है, जो असम जैसे राज्य में अपनी पकड़ बनाने के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत शरण देने का काम तेजी से कर रही है।

नई दिल्ली। असम की राजनीतिक पार्टी एआईयूडीएफ के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने आर्मी चीफ विपिन रावत के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि एक आर्मी चीफ को किसी राजनीतिक दल की तरह उनकी पार्टी पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को समर्थन देने के आरोप नहीं लगाने चाहिए। अगर वह सक्षम हैं तो उन्हे बांग्लादेशियों को सीमा पार भेजने के प्रयास करना चाहिए।बदरुद्दीन ने कहा कि वह केन्द्र सरकार से अपील करते हैं कि एक एक आदमी की जांच की जाए। 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद जो लोग गैरकानूनी रूप से भारत में रहते पाए जाऐं उन्हें बांग्लादेश भेज देना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह बेदह अपमानजनक लगता है कि जब आपके ही देश में आपको घुसपैठिया कहा जाए। बार बार आपको बांग्लादेशी कह कर बुलाया जाए। यह तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्ट करे कि कौन बांग्लादेशी है और कौन भारतीय।उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ ने जिस तरह से एक राजनीतिक बयान देते हुए उनकी पार्टी पर घुसपैठियों को शरण देने के आरोप लगाए है। ऐसा लगता है मानो देश के आर्मी चीफ आरएसएस और बीजेपी की जुबान बोल रहे हों।आपको बता दें कि पूर्वोत्तर भारत में विदेशी सीमा पर सुरक्षा प्रबंधों को लेकर आयोजित एक संगोष्ठी में सेना के पक्ष को रखते हुए भारतीय सेना के चीफ विपिन रावत ने कहा था कि सीमा से सटे राज्यों में राजनीतिक लाभ के लिए कुछ पार्टियां गैरकानूनी रूप से भारत में घुसने वाले लोगों को शरण दे रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने बदरुद्दीन अजमल द्वारा स्थापित एआईयूडीएफ का उदाहरण दिया था। विपिन रावत ने कहा था कि एआईयूडीएफ एक ऐसी ही तेजी से उभरती पार्टी है, जो असम जैसे राज्य में अपनी पकड़ बनाने के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत शरण देने का काम तेजी से कर रही है।