चौथी बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने अजित पवार, चाचा शरद पवार की रणनीति या मजबूरी

ajit pawar
चौथी बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने अजित पवार, शरद पवार की रणनीति या मजबूरी

नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से एनसीपी नेता अजित पवार पूरे देश में सियासी सनसनी बन गए थे। एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने 23 नवंबर की सुबह राज्य के नौवें उपमुख्यमंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ले ली थी। हालांकि बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। आज फिर अजित पवार ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की शपथ ली है। अजित पवार अपने चाहने वालों और जनता के बीच दादा (बड़े भाई) के रूप में लोकप्रिय हैं।

Ajit Pawar Became Deputy Chief Minister Of Maharashtra For The Fourth Time Sharad Pawars Strategy Or Helplessness :

22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रावारा में शरद पवार के बड़ भाई अनंतराव पवार के घर जन्मे अजित पावर ने आज महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली। उन्होंने चौथी बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जब अजित पवार पढ़ाई पूरी कर रहे थे। उसी समय उनके चाचा शरद पवार महाराष्ट्र की सियासत में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। इसके बाद अजित पवार पुणे से मुम्बई आ गए। चाचा शरद की बदौलत उन्हें पहला बड़ा सियासी ब्रेक 1982 में मिला। अजित को कोआपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में जगह मिली। इसके बाद 1991 में उन्होंने पुणे जिला सहकारिता (पीडीसी) बैंक का चेयरमैन चुना गया। वह 16 वर्षों तक इस पद पर काबिज रहे। इसी दौरान वह बारामाती से सांसद भी चुने गए।

इसके बाद आजित पवार बारामती विधानसभा सीट से 1995, 1999, 2004 और 2014 में विधायक चुने गए। 1991 से 1992 तक उन्हें महाराष्ट्र सरकार में कृषि और उर्जा मंत्री बनाया गया। इसके बाद अजीत पवार ने कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 23 से 26 नवंबर तक 80 घंटों के लिए वह राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे। आज एकबार फिर उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में बतौर उपमुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली है।

मजबूरी का नाम अजित पवार
अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। बीते 37 दिनों में यह दूसरा मौका है, जब अजित पवार ने उपमुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली है। अजित पवार के उपमुख्‍यमंत्री बनने के बाद अब ये सवाल उठ रहे हैं कि अजित को ये जिम्‍मेदारी देना, शरद पवार की मजबूरी है या फिर सियासी रणनीति? एनसीपी से बगावत करने वाले अजित पवार ने भाजपा से मिलकर पिछले दिनों मंत्रिपद की शपथ ली थी? हालांकि, बाद में वह इस्‍तीफा देकर अपनी पार्टी के साथ खड़े नजर आए थे। शरद पवार ने भी कहा था कि अजित कहीं गए ही नहीं थे, इसलिए लौटने की बात ही नहीं है।

नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से एनसीपी नेता अजित पवार पूरे देश में सियासी सनसनी बन गए थे। एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने 23 नवंबर की सुबह राज्य के नौवें उपमुख्यमंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ले ली थी। हालांकि बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। आज फिर अजित पवार ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की शपथ ली है। अजित पवार अपने चाहने वालों और जनता के बीच दादा (बड़े भाई) के रूप में लोकप्रिय हैं। 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रावारा में शरद पवार के बड़ भाई अनंतराव पवार के घर जन्मे अजित पावर ने आज महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली। उन्होंने चौथी बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जब अजित पवार पढ़ाई पूरी कर रहे थे। उसी समय उनके चाचा शरद पवार महाराष्ट्र की सियासत में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। इसके बाद अजित पवार पुणे से मुम्बई आ गए। चाचा शरद की बदौलत उन्हें पहला बड़ा सियासी ब्रेक 1982 में मिला। अजित को कोआपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में जगह मिली। इसके बाद 1991 में उन्होंने पुणे जिला सहकारिता (पीडीसी) बैंक का चेयरमैन चुना गया। वह 16 वर्षों तक इस पद पर काबिज रहे। इसी दौरान वह बारामाती से सांसद भी चुने गए। इसके बाद आजित पवार बारामती विधानसभा सीट से 1995, 1999, 2004 और 2014 में विधायक चुने गए। 1991 से 1992 तक उन्हें महाराष्ट्र सरकार में कृषि और उर्जा मंत्री बनाया गया। इसके बाद अजीत पवार ने कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 23 से 26 नवंबर तक 80 घंटों के लिए वह राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे। आज एकबार फिर उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में बतौर उपमुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली है। मजबूरी का नाम अजित पवार अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। बीते 37 दिनों में यह दूसरा मौका है, जब अजित पवार ने उपमुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली है। अजित पवार के उपमुख्‍यमंत्री बनने के बाद अब ये सवाल उठ रहे हैं कि अजित को ये जिम्‍मेदारी देना, शरद पवार की मजबूरी है या फिर सियासी रणनीति? एनसीपी से बगावत करने वाले अजित पवार ने भाजपा से मिलकर पिछले दिनों मंत्रिपद की शपथ ली थी? हालांकि, बाद में वह इस्‍तीफा देकर अपनी पार्टी के साथ खड़े नजर आए थे। शरद पवार ने भी कहा था कि अजित कहीं गए ही नहीं थे, इसलिए लौटने की बात ही नहीं है।