प्लॉट आवंटन केस: CBI की बड़ी कार्रवाई, हुड्डा और वोरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

प्लॉट आवंटन केस: CBI की बड़ी कार्रवाई, हुड्डा और वोरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
प्लॉट आवंटन केस: CBI की बड़ी कार्रवाई, हुड्डा और वोरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

हरियाणा। CBI ने नेशनल हेराल्‍ड के स्‍वामित्‍व वाली कंपनी एजेएल कंपनी को प्‍लॉट आवंटन के मामले में शनिवार को अदालत में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया। हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने बहुचर्चित एजेएल मामले में सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी।

Ajl Land Allotment Case Cbi Chargesheet Filed In Court Against Hooda Motilal Vora :

बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने सीएम रहते हुए नेशनल हेराल्ड की सब्सिडी एसोसिएट्स जनरल लिमिटेड (एजेएल) कंपनी को 2005 में 1982 की दरों पर प्लॉट अलॉट करवाया। मामले में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप में हरियाणा विजिलेंस विभाग ने अप्रैल-2016 में मामला दर्ज किया था।

मामले में सीबीआई ने एआईसीसी के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को भी पार्टी बनाया हुआ है। विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई भी जांच कर चुकी है। जांच पूरी करने के बाद राज्य सरकार से अभियोग की मंजूरी मांगी थी। सरकार ने एडवोकेट जनरल से कानूनी राय लेने के बाद मामले को राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की मंजूरी के लिए भेज दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था और अभियोजन पेश करने की मंजूरी दे दी गई थी। ऐसे में अब हुड्डा को इस मामले में भी मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।

ऐसे किया गया जमीन आवंटन में ‘खेल’

आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 28 अगस्त 2005 को पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को पंचकूला में जमीन का आवंटन बहाल किया। यह जमीन एजेएल को 30 अगस्त 1982 में आवंटित की गई थी। शर्त यह थी कि कंपनी छह महीने में जमीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी लेकिन, ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने जमीन रिज्यूम कर ली। साथ ही 10 फीसदी राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई। इसका एजेएल ने विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की। यहां भी एजेएल को राहत नहीं मिली।

आरोप है कि एजेएल को साल 2005 में हुड्डा के मुख्यमंत्रित्वकाल में बड़ी राहत उस समय मिल गई जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन होने के नाते तब के मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह जमीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया। बताया जाता है कि तब हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर जमीन को आवंटित करना संभव नहीं है। बावजूद 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट हो गई।

हरियाणा। CBI ने नेशनल हेराल्‍ड के स्‍वामित्‍व वाली कंपनी एजेएल कंपनी को प्‍लॉट आवंटन के मामले में शनिवार को अदालत में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया। हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने बहुचर्चित एजेएल मामले में सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी।बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने सीएम रहते हुए नेशनल हेराल्ड की सब्सिडी एसोसिएट्स जनरल लिमिटेड (एजेएल) कंपनी को 2005 में 1982 की दरों पर प्लॉट अलॉट करवाया। मामले में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप में हरियाणा विजिलेंस विभाग ने अप्रैल-2016 में मामला दर्ज किया था।मामले में सीबीआई ने एआईसीसी के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को भी पार्टी बनाया हुआ है। विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई भी जांच कर चुकी है। जांच पूरी करने के बाद राज्य सरकार से अभियोग की मंजूरी मांगी थी। सरकार ने एडवोकेट जनरल से कानूनी राय लेने के बाद मामले को राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की मंजूरी के लिए भेज दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था और अभियोजन पेश करने की मंजूरी दे दी गई थी। ऐसे में अब हुड्डा को इस मामले में भी मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।

ऐसे किया गया जमीन आवंटन में 'खेल'

आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 28 अगस्त 2005 को पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को पंचकूला में जमीन का आवंटन बहाल किया। यह जमीन एजेएल को 30 अगस्त 1982 में आवंटित की गई थी। शर्त यह थी कि कंपनी छह महीने में जमीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी लेकिन, ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने जमीन रिज्यूम कर ली। साथ ही 10 फीसदी राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई। इसका एजेएल ने विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की। यहां भी एजेएल को राहत नहीं मिली।आरोप है कि एजेएल को साल 2005 में हुड्डा के मुख्यमंत्रित्वकाल में बड़ी राहत उस समय मिल गई जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन होने के नाते तब के मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह जमीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया। बताया जाता है कि तब हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर जमीन को आवंटित करना संभव नहीं है। बावजूद 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट हो गई।