सपा दंगल: किसने क्या बोला, अखिलेश कब हुए भावुक…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी का सियासी झगड़ा में नया टि्वस्ट आ गया है जब 24 घंटे के अंदर ही अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का समाजवादी पार्टी से निष्कासन वापस ले लिया गया है। यह बात खुद सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। शिवपाल ने ट्वीट किया, नेताजी के आदेशानुसार, अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का पार्टी से निष्कासन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है और अब हमलोग यूपी विधानसभा चुनाव में मिलकर सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे।




इस पूरे घटना क्रम में किसने क्या कहा….

– भावुक अखिलेश यादव ने कहा, ‘पिता को उत्तर प्रदेश जीत कर तोहफा दूँगा। मैं पिता से अलग नहीं हूं। ’
– अखिलेश यादव से बोले विधायक- जनता ने आप पर भरोसा दिखाया है, नेता जी का सम्मान हम करते है और करते रहंगे।
– आजम खान ने अखिलेश यादव को समझाते हुए कहा, ‘पिता ने ही आपको सीएम बनाया।’ फिर अखिलेश बोले, ‘जो हूं पिता जी की बदौलत हूं लेकिन वो मेरे में साजिश देखते रहे। ’
– शिवपाल यादव ने कहा- अखिलेश यादव और रामगोपाल का निष्कासन रद्द हो गया है, अखिलेश और नेता जी मिलकर उम्मीदवारों को नई लिस्ट जारी करेंगे।
– अमर सिंह ने कहा, ‘आज तो कुछ ऐसा लग रहा है कि राम चंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुक आएगा, बेटा करेगा राज बेचारा बाप जंगल को जाएगा।
– लालू यादव ने किया ट्वीट- यूपी देश का भविष्य तय करता है और वहाँ सब ठीक-ठाक करना हमारी जिम्मेवारी है। अखिलेश में दम पर सपा की सरकार बनेगी और बीजेपी चौथे नम्बर पर रहेगी।
– मुलायम सिंह को लेकर सपा नेता अबु आजमी ने दिया बड़ा बयान, कहा- उनके साथ सब दलाल जमा हो गए हैं, सब गलत राय दे रहे हैं।
– सपा नेता अतीक अहमद ने कहा- नेता हमारे मुलायम सिंह हैं जबकि मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव हमारी पसंद हैं।
– ममता ने अखिलेश को फोन कर कहा- डटे रहो हम तुम्हारे साथ हैं।
– जूही सिंह ने कहा- जब मेरे मुख्यमंत्री को निकाल दिया गया है तो ये मेरा दायित्व बनता है कि मैं भी प्रवक्ता के पद से त्याग पत्र दे दूं पर मैं नेता जी के खिलाफ नहीं हूं लेकिन अपने मुख्यमंत्री के साथ खड़ी हूं।




सूत्रों की माने तो मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच सुलह के तीन फॉर्मुले सामने आए हैं।
पहला- अमर सिंह को पार्टी से निकाल दिया जाए।
दूसरा- अखिलेश यादव को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया जाए और मुलायम सिंह यादव संरक्षक के तौर पर रहें।
तीसरा- दो जनवरी को होने वाली बैठक को रद्द कर दिया जाए।

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