मैंने अपने चहेतों को दिया यश भारती सम्मान, आप भी बाटें: अखिलेश यादव

लखनऊ। अपने चहेतों को यश भारती सम्मान बांटने के मामले में आलोचना झेल रहें सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज सफाई दी। आजमगढ़ के एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि यह सम्मान देश का नाम ऊंचा करने वाले खिलाड़ियों और दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले सैनिकों को दिए गए हैं। इस दौरान अखिलेश ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने इन्हें बंद कर शहीदों और खिलाड़ियों का अपमान किया है। अखिलेश यादव ने कहा, ‘भाजपा कहती है कि हमने अपने खास लोगों को यश भारती सम्मान दिया। आप भी अपने खास लोगों को यह सम्मान दे दें, हम कौन सा आपको रोक रहे हैं।’

इससे पहले आरटीआई के तहत हासिल जानकारी के हवाले से खबरें आई थीं कि अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में यश भारती सम्मान के लिए लोगों का चुनाव करते हुए योग्यता से ज्यादा तरजीह अपनी और अपने मंत्रियों की पसंद को दी। खबरों के मुताबिक अखिलेश यादव सरकार ने 200 से ज्यादा लोगों को यह सम्मान दिया। यादव परिवार के पुरोहित से लेकर सैफई के ग्राम प्रधान तक तमाम लोगों को मिले यश भारती सम्मान पर सवाल उठे। यहां तक कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कार्यालय के एक ओएसडी ने खुद ही अपने नाम की अनुशंसा की और उसे पुरस्कार मिल भी गया। उत्तर प्रदेश के एक आईएएस की बेटी को महज 19 साल की उम्र में यह सम्मान मिल गया।

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यश भारती पुरस्कार 1994 में मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया था।सपा सरकार जाने के साथ यह भी बंद हो गया। 2012 में सपा की सत्ता में वापसी के साथ यश भारती का दौर फिर से शुरू हुआ। विजेता को 11 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और 50 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती थी।विधानसभा चुनाव के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इन पुरस्कारों की समीक्षा करने की बात कही थी। फिलहाल इसके तहत मिलने वाली 50 हजार रुपये की मासिक पेंशन पर रोक लगी हुई है।

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