सरकार ने विकास किया होता तो रथयात्रा की जरूरत ही न पड़ती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में गुरुवार को निकाली गयी विकास रथयात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अगर वाकई विकास कायरे में दिलचस्पी दिखायी होती तो उन्हें रथयात्रा निकालने की जरूरत न पड़ती।सुश्री मायावती ने शुक्रवार को यहां कहा कि किसी भी सरकार की पहचान उसके काम से होती है जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लोग सिर्फ विकास के दावे करने के लिए जानते हैं। केवल शिलान्यास कर देने अथवा आधे-अधूरे कायरे का उद्घाटन करने को विकास नहीं कहा जा सकता।




लखनऊ मेट्रो समेत अन्य योजनाओं का लाभ अब तक लोगों को नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने जनहित और जनकल्याण के वाकई काम किये होते तो उन्हें सरकारी खर्च पर शानशौकत के साथ यह ‘‘विकास रथयात्रा’ निकालने की जरूरत ही न पड़ती। अखिलेश राज में जातिवाद, भ्रष्टाचार और जंगलराज का बोलबाला रहा है। इसके लिए कई बार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से सपा सरकार को फटकार भी मिल चुकी है।बसपा प्रमुख ने कहा कि डेंगू जैसी घातक बीमारी के प्रदेश में महामारी का रूप धारण करने के बाद उच्च न्यायालय को इस मामले में भी दखल देना पड़ा, मगर सूबे की सरकार के मुखिया इन बातों से शर्मिंदा अथवा सबक लिये बगैर ‘‘एम्बुलेन्स सेवा’ का ¨ढढोरा पीटते रहे।

समाजवादी विकास रथ यात्रा पर तीखा प्रहार करते हुये बसपा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की ‘‘विकास रथयात्रा’ वास्तव में ‘‘दिवालिया रथयात्रा’ साबित हुई है। करोड़ों रुपये से निर्मित ‘‘लग्जरी रथ’ कुछ कदम चल कर ठिठक गया। वहीं रथयात्रा के साथ चलने वाले हुड़दंगबाजों ने रास्ते में जमकर लूटपाट की। उन्होंने कहा कि ‘‘विकास रथयात्रा’ के शुरू होने से पहले ही सपा परिवार और सपा सरकार की मौजूदगी में समाजवादी युवक आपस में उसी तरह से भिड़ गये जैसे कि उन्होंने सूबे में अराजकता व जंगलराज कायम करके हर वर्ग के लोगों का जीवन बेहाल कर रखा है। इन आपराधिक तत्वों को मुख्यमंत्री का खुला संरक्षण प्राप्त है।