क्या रार सिर्फ टोटिंयों की है….?

akhilesh case
अखिलेश यादव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले पांच दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव द्वारा खाली किए गए बंगले को लेकर हो रही है। हालांकि इस दौरान कई ऐसे मुद्दे भी सामने आए जिन पर ईमानदार छवि वाले मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली यूपी सरकार को घेरने का भरपूर मौका था। मगर ​दुर्भाग्य घोटालों को छोड़कर चर्चा खंड़हर में तब्दील हुए 4 विक्रमादित्य मार्ग नामक बंगले की हो रही है। जिस बहस का कोई छोर नहीं है, उस पर अकथित और काल्पनिक आधार पर ताल ठोंकी जा रही है।

Akhilesh Yadavs Bungalow Case Is It All About Tap Or Something Else :

अखिलेश यादव के बंगले के नाम से मशहूर हो चुके इस बंगले को आज भले ही खंडहर कहा जा रहा हो लेकिन वास्तविकता यह है कि कभी यह बंगला लखनऊ के उन गिने चुने बंगलों में एक था, जिसमें एक आम आदमी के जीने के लिए फाइव स्टार सुविधाएं मौजूद थीं।

सत्ता में रहते ही अखिलेश यादव ने अपने परिवार की सुरक्षा और सुख—सुविधा के लिहाज से हर संभव युक्ति इस बंगले में फिट की थी। यह जांच का विषय है कि उसकी कीमत सरकारी खजाने से चुकाई गई थी या फिर अखिलेश यादव ने इसके लिए अपने निजी बैंक बैलेंस से खर्चे किए थे।

अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंगला बचाने के लिए हैसियत भर जतन किए लेकिन सत्ता से दूर होने के चलते वह कामयाब नहीं हो सके। मजबूरन वह अपना सामान और परिवार लेकर बंगले से निकल गए। अखिलेश ही क्या उनकी जगह हम और आप होते तो ऐसी मजबूरी की स्थिति में इससे अधिक कुछ नहीं कर सकता था।

बंगला खाली होने के बाद जिस तरह की तस्वीरें सामने आयीं, उन्होंने सुर्खियां बटोरीं। तरह—तरह की प्रतिक्रियाएं आईं किसी ने कहा कि सरकारी सामान समेंट ले गए, तो किसी ने कहा कि टोंटियां तक चुरा ले गए।

टोटियों और टाइल्स की चोरी के आरोपों ने निश्चित तौर पर अखिलेश यादव के लिए निंदा का ऐसा माहौल तैयार कर दिया, जिसे सक्रिय राजनीति में रहने वाला कोई कद्दावर नेता चुप्पी से नहीं तोड़ पाता। लिहाजा अखिलेश यादव ने भी पांच दिनों के इंतजार के बाद बुधवार को बंगला और खंडहर का जाप कर रही मीडिया और सत्तारूढ़ सरकार पर अपने अंदाज में हमला बोला, इतना ही नहीं वह अपने साथ दो टोंटियां भी लाए और कहा कि वह नुकसान की पाई पाई की भरपाई के लिए तैयार हैं। सरकार को नुकसान की लिस्ट तैयार करने की चुनौती भी दे गए।

पहले सत्तारूढ़ दल की चढ़ाई और फिर आरोपों का सामना कर रहे अखिलेश यादव की चढ़ाई। यह माहौल कुछ ऐसा था मानों दोनों पक्ष हाथापाई के मानसिकता के साथ एक दूसरे को पीठ दिखा रहे हों। पूरी चिल्लम चिल्ली क्यों है उसे लेकर आरोप लगाने वाले खुलकर बोलने को तैयार नहीं है और सफाई देने वाले चींख चिल्ला भी रहे हैं।

कुल मिलाकर यूपी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री पर बिना शब्दों का प्रयोग किए आरोप लगा रही है कि वह अपने बंगले में छिपे कालेधन को निकाल ले गए। जो तोड़फोड़ सरकारी बंगले में हुई, उसका कारण बंगले में छिपाए गए कालेधन को निकालना था। वहीं अखिलेश यादव अप्रत्यक्ष रूप से कह गए कि पहले बताया जाए कि उन्होंने लूटा क्या है, जिसे भाजपा कालाधन बता रही है। वह केवल वही माल ले गए जो उनका था।

अगर टोंटियां ही कालाधन हैं तो अखिलेश निश्चित ही बाजी मार ले गए हैं। वह टोंटियों को हाथ में लेकर मीडिया के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं और योगी सरकार को ढेंगा भी दिखा रहे हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले पांच दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव द्वारा खाली किए गए बंगले को लेकर हो रही है। हालांकि इस दौरान कई ऐसे मुद्दे भी सामने आए जिन पर ईमानदार छवि वाले मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली यूपी सरकार को घेरने का भरपूर मौका था। मगर ​दुर्भाग्य घोटालों को छोड़कर चर्चा खंड़हर में तब्दील हुए 4 विक्रमादित्य मार्ग नामक बंगले की हो रही है। जिस बहस का कोई छोर नहीं है, उस पर अकथित और काल्पनिक आधार पर ताल ठोंकी जा रही है।अखिलेश यादव के बंगले के नाम से मशहूर हो चुके इस बंगले को आज भले ही खंडहर कहा जा रहा हो लेकिन वास्तविकता यह है कि कभी यह बंगला लखनऊ के उन गिने चुने बंगलों में एक था, जिसमें एक आम आदमी के जीने के लिए फाइव स्टार सुविधाएं मौजूद थीं।सत्ता में रहते ही अखिलेश यादव ने अपने परिवार की सुरक्षा और सुख—सुविधा के लिहाज से हर संभव युक्ति इस बंगले में फिट की थी। यह जांच का विषय है कि उसकी कीमत सरकारी खजाने से चुकाई गई थी या फिर अखिलेश यादव ने इसके लिए अपने निजी बैंक बैलेंस से खर्चे किए थे।अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंगला बचाने के लिए हैसियत भर जतन किए लेकिन सत्ता से दूर होने के चलते वह कामयाब नहीं हो सके। मजबूरन वह अपना सामान और परिवार लेकर बंगले से निकल गए। अखिलेश ही क्या उनकी जगह हम और आप होते तो ऐसी मजबूरी की स्थिति में इससे अधिक कुछ नहीं कर सकता था।बंगला खाली होने के बाद जिस तरह की तस्वीरें सामने आयीं, उन्होंने सुर्खियां बटोरीं। तरह—तरह की प्रतिक्रियाएं आईं किसी ने कहा कि सरकारी सामान समेंट ले गए, तो किसी ने कहा कि टोंटियां तक चुरा ले गए।टोटियों और टाइल्स की चोरी के आरोपों ने निश्चित तौर पर अखिलेश यादव के लिए निंदा का ऐसा माहौल तैयार कर दिया, जिसे सक्रिय राजनीति में रहने वाला कोई कद्दावर नेता चुप्पी से नहीं तोड़ पाता। लिहाजा अखिलेश यादव ने भी पांच दिनों के इंतजार के बाद बुधवार को बंगला और खंडहर का जाप कर रही मीडिया और सत्तारूढ़ सरकार पर अपने अंदाज में हमला बोला, इतना ही नहीं वह अपने साथ दो टोंटियां भी लाए और कहा कि वह नुकसान की पाई पाई की भरपाई के लिए तैयार हैं। सरकार को नुकसान की लिस्ट तैयार करने की चुनौती भी दे गए।पहले सत्तारूढ़ दल की चढ़ाई और फिर आरोपों का सामना कर रहे अखिलेश यादव की चढ़ाई। यह माहौल कुछ ऐसा था मानों दोनों पक्ष हाथापाई के मानसिकता के साथ एक दूसरे को पीठ दिखा रहे हों। पूरी चिल्लम चिल्ली क्यों है उसे लेकर आरोप लगाने वाले खुलकर बोलने को तैयार नहीं है और सफाई देने वाले चींख चिल्ला भी रहे हैं।कुल मिलाकर यूपी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री पर बिना शब्दों का प्रयोग किए आरोप लगा रही है कि वह अपने बंगले में छिपे कालेधन को निकाल ले गए। जो तोड़फोड़ सरकारी बंगले में हुई, उसका कारण बंगले में छिपाए गए कालेधन को निकालना था। वहीं अखिलेश यादव अप्रत्यक्ष रूप से कह गए कि पहले बताया जाए कि उन्होंने लूटा क्या है, जिसे भाजपा कालाधन बता रही है। वह केवल वही माल ले गए जो उनका था।अगर टोंटियां ही कालाधन हैं तो अखिलेश निश्चित ही बाजी मार ले गए हैं। वह टोंटियों को हाथ में लेकर मीडिया के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं और योगी सरकार को ढेंगा भी दिखा रहे हैं।