CM अखिलेश ने फिर दिखाई ताकत, रामगोपाल की वापसी के साथ शिवपाल हासिये पर





लखनऊ। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव द्वारा रामगोपाल यादव की पार्टी सदस्यता को बहाल किए जाने के बाद यूपी के सियासी गलियारों में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गरम है। रामगोपाल यादव की पार्टी में सभी पदों पर बहाली को सीएम अखिलेश यादव की कोशिशों का परिणाम माना जा रहा है। वहीं यादव परिवार के करीबियों का कहना है कि 22 नवंबर को अपना 77 वां जन्मदिन मनाने जा रहे मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते कि उनके ​कुनबे में कोई बिखराव रहे जिसका फायदा उनके विरोधी उठा सकें। इस बीच रामगोपाल यादव की पार्टी में वापसी के बाद शिवपाल यादव की यूपी सरकार में वापसी न होना कहीं न कहीं इस बात के संकेत दे रहा है कि यादव परिवार के बीच अभी भी बहुत कुछ सामान्य नहीं है।




सूत्रों की माने तो यूपी सरकार 21 नवंबर को अपने सबसे बड़े प्रोजेक्ट एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने जा रही है। इस आयोजन के बाद 22 नवंबर को नेता जी का 77वें जन्मदिन पर एक बड़ा आयोजन होना है। बहुत हद तक संभव है कि इन दोनों ही आयोजनों में यादव परिवार के बीच बनते बिगड़ते रिश्तों का असर देखने को मिले।

फिलहाल पार्टी में अपनी वापसी पर बोलते हुए रामगोपाल यादव ने कहा है कि घर के भीतर जो भी मतभेद थे वे सुलझा लिए गए हैं। शिवपाल और वह अलग अलग नहीं हैं। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी के मुखिया परिवार के राजनीतिक सफर को करीब से देखने वालों का मानना है कि नेता जी ने यूपी के चुनावों को देखते हुए भले ही अखिलेश यादव के दबाव में रामगोपाल यादव को पार्टी में वापस ले लिया हो, लेकिन शिवपाल यादव और अमर सिंह की जोड़ी इस फैसले को आसानी से हजम नहीं कर पाएगी।




यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा ये भी है कि यादव परिवार के भीतर तीन महीनों तक चला विवाद एक सियासी ड्रामा था। जिसे साढ़े चार सालों तक एक कमजोर सीएम होने की आलोचना झेलते आए अखिलेश यादव की छवि को बदलने के लिए रचा गया था। जिस तरह से सीएम अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव और पिता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए एक से बढ़कर एक कठोर फैसले लिए उसके बाद विपक्षी दलों से लेकर जनता तक यह संदेश गया है कि समाजवादी पार्टी और समाजवादी सरकार में वही होता है जो अखिलेश यादव चाहते हैं। अखिलश यादव एक सशक्त और सक्षम नेता है, जो अपने पिता का आदर तो करते है लेकिन अपने फैसलों पर अड़िग रहना भी जानते हैं।




वहीं दूसरी ओर करीब तीन महीने पहले मुलायम सिंह यादव परिवार के परिवार में बेटे अखिलेश और छोटे भाई शिवपाल यादव के बीच की शुरू हुए शह और मात के खेल में शिवपाल को हारे हुए खिलाड़ी के तौर भी देखा जा रहा है। देखा जाए तो इस लड़ाई में शिवपाल के हिस्से में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी और रामगोपाल की बर्खास्तगी दो ही उपलब्धियां दिख रहीं थी।




उन्होंने जिस तरह से मीडिया के सामने आकर रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाले जाने की घोषणा की थी उसे रामगोपाल की बहाली से कड़ा झटका लगा है। रामगोपाल यादव की बहाली को शिवपाल यादव को यूपी की सियासत में हासिए पर धकेले जाने की तरह देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक रामगोपाल की पार्टी में वापसी के बाद से​ शिवपाल यादव का कोई बयान मीडिया के सामने नहीं आया है।

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