आज है अक्षय नवमी, जानें इसका महत्व और पूजन विधि

आज है अक्षय नवमी, जानें इसका महत्व और पूजन विधि
आज है अक्षय नवमी, जानें इसका महत्व और पूजन विधि

लखनऊ। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी भगवान विष्णु के प्रतीक आंवला के पेड़ की पूजा करते हैं और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय नवमी की पूजा आवंले के पेड़ से जुड़ी होती है इसी वजह से इसे आंवला नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का भी खास महत्व होता है। उत्तर भारत के कई इलाकों में आज के दिन लोग सबसे अच्छा और अपना पसंदीदा पकवान बनाकर आवंले के पेड़ के नीचे जाते हैं और पूजा के बाद सपरिवार आंवले के नीचे प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस साल अक्षय नवमी का व्रत 5 नंवबर यानि आज मनाया जा रहा है। आइये जानते हैं इससे जुड़ी अन्य जांकारियों के बारे में….

Akshay Navami 2019 Jane Iska Mahtva :

आंवला के पेड़ की पूजा का महत्व-

  • अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं उन पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूर्ण करती हैं।
  • आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है लेकिन अक्षय नवमी के दिन इसमें सभी देवी देवता विराजते हैं।
  • अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के पूजन से सभी देवी देवताओं की पूजा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

अक्षय नवमी पूजा विधि-

  • प्रात: नदी या पास के जलाशय में स्नान करने के बाद आवंले के पेड़ के आसपास सफाई करनी चाहिए।
  • आंवले के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए।
  • इसके बाद फूल, हल्दी-चावल, कुमकुम/सिंदूर, से पूजा करना चाहिए।
  • आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए और हवन आदि करना चाहिए।
  • इसके बाद आंवले के पेड़ की 7 बार परीक्रमा करनी चाहिए।
  • परिक्रम पूरी होने के बाद लोगों को प्रसाद बांटना चाहिए और आवंले के पेड़ के नीचे भोजन करना चाहिए।
लखनऊ। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी भगवान विष्णु के प्रतीक आंवला के पेड़ की पूजा करते हैं और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय नवमी की पूजा आवंले के पेड़ से जुड़ी होती है इसी वजह से इसे आंवला नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का भी खास महत्व होता है। उत्तर भारत के कई इलाकों में आज के दिन लोग सबसे अच्छा और अपना पसंदीदा पकवान बनाकर आवंले के पेड़ के नीचे जाते हैं और पूजा के बाद सपरिवार आंवले के नीचे प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस साल अक्षय नवमी का व्रत 5 नंवबर यानि आज मनाया जा रहा है। आइये जानते हैं इससे जुड़ी अन्य जांकारियों के बारे में.... आंवला के पेड़ की पूजा का महत्व-
  • अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं उन पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूर्ण करती हैं।
  • आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है लेकिन अक्षय नवमी के दिन इसमें सभी देवी देवता विराजते हैं।
  • अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के पूजन से सभी देवी देवताओं की पूजा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
अक्षय नवमी पूजा विधि-
  • प्रात: नदी या पास के जलाशय में स्नान करने के बाद आवंले के पेड़ के आसपास सफाई करनी चाहिए।
  • आंवले के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए।
  • इसके बाद फूल, हल्दी-चावल, कुमकुम/सिंदूर, से पूजा करना चाहिए।
  • आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए और हवन आदि करना चाहिए।
  • इसके बाद आंवले के पेड़ की 7 बार परीक्रमा करनी चाहिए।
  • परिक्रम पूरी होने के बाद लोगों को प्रसाद बांटना चाहिए और आवंले के पेड़ के नीचे भोजन करना चाहिए।