कोर्ट ने खारिज कर दी 114 करोड़ के घोटाले की जांच के खिलाफ डायरेक्टर की याचिका

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन में 114 करोड़ के वित्तीय घोटाले की जांच के खिलाफ फेडरेशन के डायरेक्टर की याचिका खारिज कर दी है। डायरेक्टर डा.रश्मि यादव ने जनहित याचिका दायर कर आयुक्त एवं रजिस्ट्रार कोआपरेटिव के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि डायरेक्टर को इतने बड़े घोटाले की जांच के खिलाफ जनहित में याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जांच आदेश से प्रभावित किसी भी कर्मचारी अथवा अधिकारी ने याचिका दाखिल नहीं की है। जांच घोटाले में लिप्त कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई किये जाने के उद्देश्य से इस करोड़ों के वित्तीय घोटाले की जांच का आदेश आयुक्त एवं रजिस्ट्रार कोआपरेटिव यूपी ने दिया है।




यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने कोआपरेटिव फेडरेशन की डायरेक्टर डा.रश्मि यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि आडिट सेल के डिप्टी चीफ नफीस अहमद व प्रौद्योगिकी विविद्यालय कानपुर के पूर्व प्रो.महेश सिंह की मिलीभगत से याचिका दाखिल कर घोटाले की जांच की मांग की। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को विचार करने का आदेश दिया। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी का कहना था कि आडिट रिपोर्ट में 152 आपत्तियों में से 16 को ही जारी रखा, शेष को रद्द कर दिया है। इन 16 आपत्तियों में से 8 आपत्तियां निरस्त हो गयी हैं।




अब केवल आठ शेष हैं जो गबन की न होकर अनियमितता बरतने की हैं। महेश सिंह ने दुरभिसंधि कर 322 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया। कई याचिकाएं दाखिल कर फेडरेशन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया। अवमानना याचिका दाखिल कर दबाव डाला और रजिस्ट्रार से 16 आपत्तियों में 114.16 करोड़ के घोटाले की जांच कराने का आदेश ले लिया। कोर्ट ने कहा कि जांच से प्रभावित किसी कर्मचारी ने याचिका दाखिल नहीं की है। जांच के खिलाफ याचिका में कोई जनहित का मुद्दा नहीं है।