दोबारा जारी होगा UPTET 2017 का परिणाम, हाईकोर्ट ने दिये निर्देश

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दोबारा जारी होगा UPTET 2017 का परिणाम, हाईकोर्ट ने दिये निर्देश

इलाहाबाद । UPTET 2017 के प्रश्न पत्र में पूछे गए 14 गलत और पाठ्यक्रम के बाहर से आए सवालों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया है।अदालत ने इस मामले में दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर सामूहिक फैसला देते हुए कई ऐसी बातें कहीं हैं जिनसे परीक्षा नियंत्रक के स्तर से प्रश्नपत्रगत होने त्रुटियों को लापरवाही कहा जा सकता है।

Allahabad High Court Order Amendment In Uptet 2017 Results :

अदालत ने प्रश्नपत्र के प्रश्नों में गलती के अलावा परीक्षा परिणाम घोषित करने के तरीकों पर भी आपत्ति दर्ज करवाई है। अदालत ने परीक्षा परिणाम के साथ ओएमआर सीट के जारी न करने और देर से जारी करने, परिणाम पर आपत्ति दर्ज करवाने की तारीखों को बढ़ाए जाने जैसे बिन्दुओं को भी गंभीतरा से लिया है।

जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सचिव परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया है कि प्रश्नपत्र में ​पूछे गए सभी 14 गलत सवालों के अंकों को मूलांक से घटाने के बाद संशोधित परिणाम घोषित किया जाए। गलत प्रश्नों को हटाने के ​बाद जितने प्रश्न बचेंगे उन्हीं के मूल्यांकन के आधार पर नया परिणाम तैयार किया जाए। इसके साथ ही 2018 के लिए शुरू होने वाली सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा को भी अदालत ने परिणाम आने तक के लिए लंबित कर दिया है।

अदालत ने माना है कि जब तक 2017 के टीईटी परीक्षा के संशोधित परिणाम नहीं आ जाते तब तक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को रोकना ही उचित होगा।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कहा कि अगर किसी प्रश्न का मुद्रण ही गलत हुआ है और विकल्प के रूप दिए गए चारों विकल्प में एक सही उत्तर भी मौजूद है, तो ऐसे में सही उत्तर को तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक प्रश्न सही नहीं है।

इलाहाबाद । UPTET 2017 के प्रश्न पत्र में पूछे गए 14 गलत और पाठ्यक्रम के बाहर से आए सवालों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया है।अदालत ने इस मामले में दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर सामूहिक फैसला देते हुए कई ऐसी बातें कहीं हैं जिनसे परीक्षा नियंत्रक के स्तर से प्रश्नपत्रगत होने त्रुटियों को लापरवाही कहा जा सकता है।अदालत ने प्रश्नपत्र के प्रश्नों में गलती के अलावा परीक्षा परिणाम घोषित करने के तरीकों पर भी आपत्ति दर्ज करवाई है। अदालत ने परीक्षा परिणाम के साथ ओएमआर सीट के जारी न करने और देर से जारी करने, परिणाम पर आपत्ति दर्ज करवाने की तारीखों को बढ़ाए जाने जैसे बिन्दुओं को भी गंभीतरा से लिया है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सचिव परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया है कि प्रश्नपत्र में ​पूछे गए सभी 14 गलत सवालों के अंकों को मूलांक से घटाने के बाद संशोधित परिणाम घोषित किया जाए। गलत प्रश्नों को हटाने के ​बाद जितने प्रश्न बचेंगे उन्हीं के मूल्यांकन के आधार पर नया परिणाम तैयार किया जाए। इसके साथ ही 2018 के लिए शुरू होने वाली सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा को भी अदालत ने परिणाम आने तक के लिए लंबित कर दिया है।अदालत ने माना है कि जब तक 2017 के टीईटी परीक्षा के संशोधित परिणाम नहीं आ जाते तब तक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को रोकना ही उचित होगा।अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कहा कि अगर किसी प्रश्न का मुद्रण ही गलत हुआ है और विकल्प के रूप दिए गए चारों विकल्प में एक सही उत्तर भी मौजूद है, तो ऐसे में सही उत्तर को तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक प्रश्न सही नहीं है।