जल्द हटाई जाएगी इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में बनी अवैध मस्जिद, आदेश जारी

जल्द हटाई जाएगी इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में बनी अवैध मस्जिद, आदेश जारी

इलाहाबाद। किसी सार्वजनिक या व्यक्तिगत जमीन को कब्जा करके खड़े किए गए धार्मिक स्थानों के निर्माण को मान्यता नहीं दी जा सकती। किसी धर्म के लोगों को अदालत से ऐसे मामलों में संवैधानिक आधार पर नरमी या समर्थन की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। यह बात बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अदालत ने कही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में बक्फ को निर्देश देते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के परिसर के भीतर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को तत्काल बंद किया जाए और मस्जिद को मौके से हटाकर किसी अन्य जगह बनाया जाए। इसके साथ ही अदालत ने कड़े शब्दों में निर्देश देते हुए कहा है कि यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ ब्रांच के परिसर पर भी लागू होता है। अदालत परिसर में बने किसी भी धार्मिक स्थान के निर्माण और वर्तमान में मौजूद स्थान पर पूजा पाठ की मनाही होगी।

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी धर्मविशेष विरुद्ध या धार्मिक पक्षपात के नजरिए से नहीं लिया जाना चाहिए। स्पष्ट तौर पर इस धार्मिक स्थल का अवैध निर्माण इस बात की ओर इशारा करता है कि हाईकोर्ट अपनी ही जमीन पर होने वाले अवैध कब्जों के प्रति गंभीर नहीं है। हाईकोर्ट सभी धर्मों के लोगों को बराबर की सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

अदालत ने इस मामले में ​सुनाए 175 पेजों के फैसले में कहा है कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का चयन करने और उस धर्म के अनुरूप पूजा पाठ और प्रार्थना करने की आजादी देता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उसे अवैध रूप से किसी सार्वजनिक स्थान या किसी और भी जमीन पर धार्मिक स्थल के निर्माण की भी आजादी है।

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इलाहाबाद ने यह फैसला अभिषेक शुक्ला नाम के एक वकील की ओर से दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। जिसमें उनकी ओर से हाईकोर्ट परिसर में एक बक्फ की ओर से अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण करवाए जाने पर अपत्ति दर्ज करवाई गई थी। विवादित धार्मिक स्थल को मस्जिद हाईकोर्ट के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण स्थानीय अथॉरिटीज की आज्ञा के बिना ही किया गया था।

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