अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, सीएम योगी के करीबी डीएम समेंत दो आईएएस को किया निलंबित

अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, सीएम योगी के करीबी डीएम समेंत दो आईएएस को किया निलंबित

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश में अवैध खनन एक बड़ा सियासी मुद्दा रहा है। रामपुर जिले में कोसी नदी पर अवैध खनन के खिलाफ साल 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने रामपुर के दो तत्कालीन जिलाधिकारियों को निलंबित करने के लिए यूपी सरकार को निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के मुख्य सचिव राजीव कुमार को निर्देश देते हुए रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेला और राकेश कुमार सिंह को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि राजीव रौतेल वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के जिलाधिकारी हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज में हुए आॅक्सीजन कांड में डीएम रौतेला पर लगे गंभीर आरोपों के बीच ​मुख्यमंत्री द्वारा उन पर दिखाए गए विश्वास के बाद रौतेला को सीएम योगी का करीबी माना जाने लगा है। जबकि राकेश कुमार सिंह वर्तमान में कानपुर देहात में तैनात हैं।

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अब देखना ये होगा कि यूपी की सत्ता में काबिज होने से पहले अवैध खनन को चुनावी मुद्दा बनाने वाली भाजपा अपनी सरकार बनने के बाद, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किस हद तक जाती।

क्या था मामला —

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रामपुर में कोसी नदी पर अवैध खनन करने के खिलाफ मकसूद नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अवैध खनन माफिया और रामपुर जिला प्रशासन की सांठ गांठ के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में रामपुर के तत्कालीन डीएम राजीव रौतेला और राजीव कुमार सिंह को अवैध खनन माफिया को लाइसेंस (पट्टा) देने के आरोप लगाए गए थे।

इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस डीबी भोंसले और जस्टिस एमके गुप्ता की खंडपीठ ने रामपुर के वर्तमान जिलाधिकारी और तत्कालीन दो जिलाधिकारियों को अदालत में तलब कर उनका पक्ष सुना था। अदालत ने 7 दिसंबर को सुनाए अपने फैसले में डीएम राजीव रौतेला और डीएम राजीव सिंह के बयानों असंतोष जाहिर करते हुए दोनों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव राजीव कुमार को अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच करवाकर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

इस फैसले को अवैध खनन माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने जिस तेवर के साथ यह फैसला दिया है उसे भविष्य के लिए एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। ​

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