UP: 4610 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का रास्ता हुआ साफ़

लखनऊ। यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4610 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का रास्ता साफ़ कर दिया है। दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। दरोगा भर्ती पर कोर्ट ने सिर्फ 315 नियुक्तियां रोकी हैं। 

Allahabad High Court Sub Inspector Recruitment Clear Reservation Policy 4610 Court Petitioner :

इलाहाबाद हाईकोर्ट भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किए जाने और मनमानी की शिकायत मिलने के बाद इस पर रोक लगाई थी। इस मामले में सरकार का पक्ष रखने के लिए खुद भर्ती बोर्ड के चेयरमैन वीके गुप्ता अदालत में हाजिर हुए और उन्होंने खुद ही बहस भी की, लेकिन अदालत उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

अदालत ने इस भर्ती से जुड़े सारे रिकॉर्ड के सभी पहलुओं को भी देखा। याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को देखने के बाद भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और सरकारी पक्ष के वकीलों को फटकार भी लगाई।

सब इंस्पेक्टर के चार हजार पदों पर होने वाली भर्ती के अंतिम नतीजों को इलाहाबाद हाईकोर्ट एक बार पहले भी रद्द कर चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर भर्ती बोर्ड ने 800 से ज्यादा लोगों को बाहर कर नई मेरिट लिस्ट जारी की थी। कई असफल अभ्यर्थियों द्वारा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया गया कि OBC के तमाम लोगों को भी मनमाने तरीके से जनरल कैटेगरी में नियुक्त कर लिया गया है।

लखनऊ। यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4610 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का रास्ता साफ़ कर दिया है। दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। दरोगा भर्ती पर कोर्ट ने सिर्फ 315 नियुक्तियां रोकी हैं। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किए जाने और मनमानी की शिकायत मिलने के बाद इस पर रोक लगाई थी। इस मामले में सरकार का पक्ष रखने के लिए खुद भर्ती बोर्ड के चेयरमैन वीके गुप्ता अदालत में हाजिर हुए और उन्होंने खुद ही बहस भी की, लेकिन अदालत उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

अदालत ने इस भर्ती से जुड़े सारे रिकॉर्ड के सभी पहलुओं को भी देखा। याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को देखने के बाद भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और सरकारी पक्ष के वकीलों को फटकार भी लगाई।

सब इंस्पेक्टर के चार हजार पदों पर होने वाली भर्ती के अंतिम नतीजों को इलाहाबाद हाईकोर्ट एक बार पहले भी रद्द कर चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर भर्ती बोर्ड ने 800 से ज्यादा लोगों को बाहर कर नई मेरिट लिस्ट जारी की थी। कई असफल अभ्यर्थियों द्वारा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया गया कि OBC के तमाम लोगों को भी मनमाने तरीके से जनरल कैटेगरी में नियुक्त कर लिया गया है।