रामगोपाल और आजम के विरोध को दरकिनार कर मुलायम ने बढ़ाया अमर सिंह का कद

Amar Singh Ko Mila Pramotion Ramgopal Aur Azam Kinare

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को पार्टी के राज्यसभा सांसद अमर सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त कर दिया है। मुलायम ने यह फैसला ऐसी स्थिति में लिया है जब उनके दो अहम सिपहसलार रामगोपाल यादव और मो0 आजम खां हाल ही में अमर सिंह के विरोध में सार्वजनिक तौर पर अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। अमर सिंह को मुलायम के कुनबे में शुरू हुई खींचतान के पीछे का विलेन बताया गया था। सीएम अखिलेश ने भी बाहरी व्यक्ति यानी अमर सिंह पर ही चाचा शिवपाल से रिश्ते खराब करने का आरोप लगाया था।




सूत्रों की माने तो नेता जी ने शिवपाल-अखिलेश एपीसोड के बाद परिवार और पार्टी के भीतर की सियासत को पलटने की ठान ली है। परिवार के भीतर शुरू हुई सियासत में उनके चचेरे भाई रामगोपाल की भूमिका को लेकर नेता जी नाराज हैं। उन्होंने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष का पद देकर गुटबाजी की जड़ को काटने के न सिर्फ निर्देश दिए हैं बल्कि कार्रवाई करने की पूरी छूट भी दे रखी है। नतीजतन शिवपाल ने सबसे पहले रामगोपाल की सत्ता को ही हिलाने का काम किया।

शिवपाल ने उनके सगे भांजे अरविन्द यादव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया। रामगोपाल यादव और उनके सांसद बेटे अक्षय यादव ने इस कार्रवाई के खिलाफ अपने स्वर बुलंद किए लेकिन उसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला। जिससे पार्टी और परिवार में रामगोपाल के गोल में आने वाले लोगों में यह संदेश गया है कि रामगोपाल यादव अब हासिए पर भेजे जा रहे हैं। रही बची कसर उस वक्त पूरी हो गई जब रामगोपाल यादव के रूख को जानते हुए भी नेता जी ने अमर सिंह को पार्टी में उनके बराबर हैसियत पर लाकर खड़ा कर दिया।




अमर सिंह के प्रमोशन के बाद पार्टी के मुस्लिम चहरे आजम खां की हालत भी कुछ कुछ रामगोपाल जैसी ही है। आजम को जब मौका लगा है उन्होंने अमर से अपनी दुश्मनी निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने अमर सिंह को दलाल से लेकर चोर तक न जाने क्या क्या कहा, लेकिन आज वही अमर सिंह सपा के राष्ट्रीय महासचिव बना दिए गए हैं। इस लिहाज से अमर और आजम पार्टी के भीतर एक ही सीढ़ी पर जा खड़े हुए हैं।

जानकारों की माने तो अमर सिंह की पार्टी में वापस लौटती हैसियत के पीछे सबसे बड़ा हाथ शिवपाल यादव का है। शिवपाल ने भतीजे सीएम अखिलेश से हुए विवाद में अपना शक्ति प्रदर्शन करने के साथ ही जिस राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया उससे वे न सिर्फ नेता जी का दिल जीतने में कामयाब रहे बल्कि सीएम अखिलेश को भी अनुभवहीन साबित कर गए।

क्या है अमर सिंह को लेकर सपा की रणनीति—

राजनीति के पंडितों की माने तो अमर सिंह की सियासी हैसियत उतनी बड़ी नहीं है जितना बड़ा कद वे बतौर मैनेजर रखते हैं। वह ठाकुर वर्ग से आते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर वोटर उनसे जुड़ाव महसूस नहीं करता लेकिन वे ठाकुर नेताओं पर अच्छी पकड़ रखते हैं। अमर सिंह के हुनर की बात करें तो यूपी में उनकी टक्कर का मैनेजर कोई दूसरा नहीं है। उनके रिश्ते बीजेपी में भी हैं तो कांग्रेस भी केन्द्र की सरकार में उनकी मदद ले चुकी है। बसपा के भी कुछ नेताओं से उनके व्यक्तिगत रिश्ते हैं।




सियासी दुश्मनों को दोस्त बनाने और मौका पड़ने पर उस दोस्ती को भुनाने का हुनर शायद ही अमर सिंह से बेहतर कोई और नेता जानता है। शायद यही वजह है कि 2017 के चुनावों से पहले अमर सिंह को लेकर सपा गंभीर है। पार्टी नेतृत्व को भली तरह से मालूम है कि वह 2012 के रिकार्ड को दोबारा नहीं दोहरा पाएगी। वर्तमान समय की बात करें तो 2017 की यूपी विधानसभा त्रिशंकु होगी। जिसके बाद विधायकों की जोड़ तोड़ करने में कामयाब होने वाली पार्टी ही सत्ता में होगी। उस परिस्थिति में सपा को अमर सिंह जैसे मैनेजर की जरूरत होगी।




नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को पार्टी के राज्यसभा सांसद अमर सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त कर दिया है। मुलायम ने यह फैसला ऐसी स्थिति में लिया है जब उनके दो अहम सिपहसलार रामगोपाल यादव और मो0 आजम खां हाल ही में अमर सिंह के विरोध में सार्वजनिक तौर पर अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। अमर सिंह को मुलायम के कुनबे में शुरू हुई खींचतान के पीछे का विलेन बताया गया था।…