UPRNN के एएमडी हेम शर्मा ने नौकरी के लिए लगाए फर्जी सर्टिफिकेट

UPRNN के एएमडी हेम शर्मा ने नौकरी के लिए लगाए फर्जी सर्टिफिकेट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने फर्जी दस्तावेजों पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली और जब दस्तावेजों की असलियत सामने आई तो उन्हें अपनी नौकरी से न सिर्फ हाथ धोना पड़ा बल्कि धोखाधड़ी के मामले में जेल भी जाना पड़ा। दस्तावेजों में धोखाधड़ी के सहारे नौकरी पाने का एक नया मामला यूपी के लोकनिर्माण विभाग की निर्माण इकाई यूपी राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) में सामने आया है। जहां एएमडी की कुर्सी तक पहुंचने के बाद रिटायर होने की तैयारी कर रहे इंजीनियर हेम शर्मा ने अपनी पूरी नौकरी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही गुजार दी।

फर्जी दस्तावोजों के मामले में फंसे इंजीनियर हेम शर्मा यूपीआरएनएन के सबसे सीनियर इंजीनियरों में हैं और विभाग के शीर्ष द्वितीय पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 31 जनवरी को वह सेवानिवृत भी होने वाले हैं।

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जानिए क्या है दस्तावेजों में फर्जीवाडा —

यूपीआरएनएन के एएमडी की कुर्सी पर बैठे हेम शर्मा अपने छात्र जीवन में औसत दर्जे के छात्र रहे हैं। 1974 में शर्मा जी ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की और इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए प्रयास करने लगे। मार्कशीट पर 46 फीसदी अंकों के साथ इंजीनियरिंग कालेजों के चक्कर लगाने के बाद हेम शर्मा को कहीं भी एडमीशन नहीं मिला।

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इंजीनियर बनने की इच्छा रखने वाले हेम शर्मा ने अपनी इस कमजोरी का काट फर्जीवाडे से निकाल लिया। शर्मा ने 46 प्रतिशत की जगह 64 प्रतिशत अंकों वाली एक मार्कशीट ​तैयार की और उत्तर प्रदेश से बहुत दूर दक्षिण भारत के एक इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला ले लिया।

हेम शर्मा ने आंध्रप्रदेश के वरंगल के इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला लिया। वर्तमान में वरंगल आंध्रप्रदेश से अलग हुए तेलंगाना राज्य का हिस्सा है। वरंगल में भी हेम शर्मा की क्षमताओं ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, वह फर्जी मार्कशीट के साथ इंजीनियरिंग कालेज तो पहुंच गए लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई उनकी समझ में नहीं आई। जिस वजह से 4 साल 6 महीने की बीटेक की डिग्री लेने में शर्मा जी को 6 साल से अधिक का समय लग गया।

वरंगल के इंजीनियरिंग कालेज से मिली बीटेक ​की डिग्री के आधार पर ही हेम शर्मा ने यूपी लोक निर्माण निगम में बतौर इंजीनि​यर भर्ती होने में कामयाबी हासिल कर ली। हेम शर्मा यूपी लोक निर्माण निगम के बेहद चर्चित इंजीनियर रहे हैं। वह यूपीआरएनएन में तैनाती के दौरान कई विवादों में फंस चुके हैं। लेकिन फर्जीवाड़े करने में अपनी मास्टरी के दम पर वह हर बार बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं।

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निर्माण निगम में ऐसे सीनियर ​इंजीनियरों की भर मार है जिन्होंने तरक्की मिलने के बाद अपनी उम्र को कम करवा दिया। इससे पूर्व में भी पर्दाफाश ऐसे ही कुछ इंजीनियरों का चेहरा सामने ला चुका है, जिनमें से कुछ ने वीआरएस ले लिया तो कुछ रिटायर हो चुके हैं।

टीम पर्दाफाश इसी खबर के अगले भाग में हेम शर्मा के फर्जीवाडे को सुबूतों को साथ अपने पाठकों के सामने रखेगी।

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