नई दिल्ली। भारत के ऊपर अमेरिका द्वारा 40 साल पहले क्रूड आॅयल के कारोबार पर लगाई गई पाबंदी आखिरकार खत्म हो गई है। दो साल पूर्व अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा भारत के ऊपर लगे प्रतिबंध को हटाने के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी क्रूड आॅयल से लदा एक समुद्री जहाज टेक्सस से भारत के लिए रवाना किया गया है। अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास से इस बात की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

अमेरिका द्वारा भारत पर लगे क्रूड आॅॅयल प्रतिबंध को हटाए जाने को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश कूटनीति की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जून महीने में प्रधानमंत्री के अमेरिकी दौरे के सामय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को सहायता देने के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था।

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मिली जानकारी के मुताबिक 2 लाख बैरल क्रूड आॅयल की पहली खेप टेक्सस बंदरगाह से चलकर सितंबर के अंतिम सप्ताह तक ओडीशा के परादीप बंदगाह तक पहुंच जाएगी। पहली खेप में आने वाले क्रूड आॅयल की कीमत करीब 640 करोड़ रुपए के करीब बताई जा रही है।

अमेरिकी क्रूड आॅयल है बेहतर —

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जानकारों की माने तो अमेरिकी क्रूड आॅयल की क्वालिटी बेहतर मानी जाती है। जिस वजह से अमेरिकी क्रूड आॅयल के शोधन पर कम लागत और अधिक व उच्च क्षमता वाले पैट्रोलियम का उत्पादन होता है। अमेरिकी क्रूड आॅयल में सल्फर तत्व अधिक होता है जिस वजह से इसे बेहतर माना जाता है। भारत ने अमेरिका को मार्स और पोसीडॉन
नाम के दो क्रूड आॅयल के आर्डर दिए हैं। ये दोनों ही क्रूड आॅयल हाई सल्फर कंटेट यानी उच्च श्रेणी में गिने जाते हैं।

मध्य पूर्व के तेल निर्यातक देशों कीे बात की जाए तो इन देशों ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आॅयल की गिरती कीमतों देखते हुए अपने उत्पदान को कम ​कर दिया है। इसके साथ ही अच्छी श्रेणी वाले क्रूड आॅयलों की कीमतों को भी बढ़ा दिया था।

भारत को क्रूड आॅयल आयात के लिए मिला नया विकल्प—

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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आॅयल आयतक देश है। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद से भारत क्रूड आॅयल को लेकर भारत की निर्भरता पूरी तरह से मध्य पूर्व के तेल निर्यातक देशों पर थी। इस नजरिए से भारत को क्रूड आॅयल आयात करने के लिए एक बेहतर विकल्प मिल गया है।

अमेरिकी क्रूड आॅयल की लागत को लेकर भ्रम —

एक ओर अमेरिकी क्रूड आॅयल की बेहतर क्वालिटी के दावे हो रहे हैं तो दूसरी ओर भारत और अमेरिका के बीच की दूरी के कारण बढ़ने वाले भाड़े को लेकर आयातकों के बीच लागत को लेकर एक भ्रम की स्थिति है। भारतीय तेल कंपनियों ने शुरुआती आॅडर्र भले ही दे दिए हो लेकिन अमेरिकी क्रूड आयात पर निर्भरता उसी स्थिति में बढ़ सकती है जब उत्पादित पैट्रोलियम पदार्थों की कीमत वर्तमान के बाजार के अनुपात में ही रहे।

पैट्रोलियम इंडस्ट्री के जानकारों की माने तो अमेरिकी क्रूड आॅयल मध्य पूर्व की कीमतों की अपेक्षाकृत कम है। अमेरिकी क्रूड आॅयल की क्वालिटी बेहतर है इस लिए शोधन खर्च भी कम होगा। इस लागत के इस अंतर से बढ़े हुए भाड़े के अंतर को कम किया जा सकेगा। लेकिन स्थिति स्पष्ट होने में कुछ खेपें आने तक का इंतजार करना चाहिए।

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25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक भारत पहुंचेगा 10 लाख बैरल क्रूड आॅयल—

एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन आॅयल कार्पोरेशन और भारत पैट्रोलियम कार्पोरेशन ने अब तक 40 लाख बैरल क्रूड आॅयल के आयात का आॅडर्र दिया है। इंडियन आॅयल की ओर से पहला आॅर्डर जुलाई के महीने में दिया था जबकि दूसरा आॅर्डर 10 अगस्त को। भारत में आने वाले अमेरिकी क्रूड आॅयल की पहली खेप 5—5 लाख बैरल मार्स और पोसीडॉन क्रूड आॅयल पहुंचेगा जिसे भारत पैट्रोलियम ने आर्डर किया था।

 

 

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