अमेरिका ने तिब्बत पर सबसे पहले हमारा साथ दिया- दलाई लामा

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अमेरिका ने तिब्बत पर सबसे पहले हमारा साथ दिया- दलाई लामा

मथुरा। तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत को लेकर अमेरिका ऐसा पहला देश है, जिसने सबसे पहले हमारा साथ दिया। उम्मीद है कि अमेरिका सबसे बड़ा ताकतवर देश होने के नाते अन्य छोटे देशों की भी मदद करेगा।
दो दिवसीय यात्रा पर मथुरा आए तिब्बती धर्मगुरु ने सोमवार को रमणरेती स्थित गुरु शरणानंद के आश्रम में मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। हमने तिब्बत के मुद्दे को लेकर जब संयुक्त राष्ट्र में आवाज उठाई थी तब अमेरिका ने सहानुभूति दिखाते हुए हमारी सहायता की।

America First Supported Us With Dalai Lama On Tibet :

उत्तराधिकारी के बारे में पूछे जाने पर दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने तो 1969 में ही कह दिया था कि दलाई लामा का पद महत्वपूर्ण नहीं है जितना यह महत्वपूर्ण है कि बौद्ध धर्म के अनुयायियों को बौद्ध धर्म का अधिकतम ज्ञान हो।
उन्होंने कहा कि बौद्ध संस्थाओं में लगभग 10 हजार और हिमालयी क्षेत्र में 6 हजार विद्यार्थी आज भी बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन में सबसे ज्यादा बौद्ध धर्म के अनुयायी रहते हैं लेकिन बौद्ध धर्म के साक्ष्य और प्रमाण सबसे अधिक भारत में ही देखने को मिलते हैं।

हजारों वर्ष पुरानी भारत की संस्कृति में आज भी नालंदा परंपरा देखने को मिलती है। दलाई लामा ने कहा कि जितने भी विद्वान यहां पर बौद्ध धर्म का अध्ययन करने के लिए आए उन्होंने बुद्ध के सिद्धांतों को समझा, परखा और तब विश्वास किया। उन्होंने कहा कि भारत अहिंसा, करुणा और मैत्री का संदेश देने वाला ऐसा देश है जो दुनिया के सामने उदाहरण बना हुआ है।

मथुरा। तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत को लेकर अमेरिका ऐसा पहला देश है, जिसने सबसे पहले हमारा साथ दिया। उम्मीद है कि अमेरिका सबसे बड़ा ताकतवर देश होने के नाते अन्य छोटे देशों की भी मदद करेगा। दो दिवसीय यात्रा पर मथुरा आए तिब्बती धर्मगुरु ने सोमवार को रमणरेती स्थित गुरु शरणानंद के आश्रम में मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। हमने तिब्बत के मुद्दे को लेकर जब संयुक्त राष्ट्र में आवाज उठाई थी तब अमेरिका ने सहानुभूति दिखाते हुए हमारी सहायता की। उत्तराधिकारी के बारे में पूछे जाने पर दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने तो 1969 में ही कह दिया था कि दलाई लामा का पद महत्वपूर्ण नहीं है जितना यह महत्वपूर्ण है कि बौद्ध धर्म के अनुयायियों को बौद्ध धर्म का अधिकतम ज्ञान हो। उन्होंने कहा कि बौद्ध संस्थाओं में लगभग 10 हजार और हिमालयी क्षेत्र में 6 हजार विद्यार्थी आज भी बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन में सबसे ज्यादा बौद्ध धर्म के अनुयायी रहते हैं लेकिन बौद्ध धर्म के साक्ष्य और प्रमाण सबसे अधिक भारत में ही देखने को मिलते हैं। हजारों वर्ष पुरानी भारत की संस्कृति में आज भी नालंदा परंपरा देखने को मिलती है। दलाई लामा ने कहा कि जितने भी विद्वान यहां पर बौद्ध धर्म का अध्ययन करने के लिए आए उन्होंने बुद्ध के सिद्धांतों को समझा, परखा और तब विश्वास किया। उन्होंने कहा कि भारत अहिंसा, करुणा और मैत्री का संदेश देने वाला ऐसा देश है जो दुनिया के सामने उदाहरण बना हुआ है।