अमेरिका का उत्तरी कोरिया से बातचीत पर इंकार

अमेरिका का उत्तरी कोरिया से बातचीत पर इंकार

नई दिल्ली। उत्तरी कोरिया के हेकड़ी भरे रवैये से अमेरिका नाराज है। जिस तरह से उत्तरी कोरिया ने दो दिन पहले एक परीक्षण के दौरान एक मिसाइल को दक्षिणी जापान के ऊपर से छोड़ा उसे लेकर दुनिया भर में उसकी निंदा हो रही है। इस बीच उत्तरी कोरिया ने जापान के ऊपर से अपने मिसाइल परीक्षण करने की बात को स्वीकार कर चुका है और अपने कार्यक्रम का विरोध कर रहे अमेरिका के गुआम पर मिसाइल दागने की धमकी दे चुका है। दुनिया को परमाणु युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा करता नजर आ रहा उत्तरी कोरिया एक वैश्विक खतरा बनता नजर आ रहा है।

उत्तर कोरिया की बयानबाजी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि परमाणु शक्ति सम्पन्न उत्तरी कोरिया से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अमेरिका ने हर विकल्प खोल रखा है। अमेरिका पिछले 25 साल से उत्तरी कोरिया से बातचीत करते आ रहे हैं और उसे फिरौती भी देता रहा है, लेकिन इसे जवाब नहीं माना जा सकता।

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अमेरिका का कहना है कि प्योंगयांग लगातार अपने हथियार परीक्षण कार्यक्रम को आगे बढ़ाता जा रहा है। जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। हम इस समस्या के हल के लिए सभी विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। सर्वसम्मति से हम किसी एक विकल्प पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई करेंगे।

अमेरिका की ओर से आए इस बयान को उत्तरी कोरिया पर संभावित सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। अब तक के कूटनीतिक प्रयासों के अंजाम को देखते हुए अमेरिका बातचीत के जरिए उत्तरी कोरिया को जवाब देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। हालांकि उत्तरी कोरिया की परमाणु क्षमता को ध्यान में रखते हुए कुछ देश सैन्य कार्रवाई के बजाय वैश्विक दबाव बनाकर उत्तरी कोरिया को झुकने के लिए मजबूर करने की रणनीति अपनाने को कह रहे हैं।

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इन देशों का मानना है कि अमेरिका चीन पर दबाव बनाकर उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाए। वर्तमान समय में केवल चीन ही एक मात्र ऐसा देश है जो उत्तरी कोरिया का खुले तौर पर समर्थन करता रहा है।

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