अमेरिकी संग्रहालय मेें रखी भारत से चुराई दो मूर्तियां वापस मिली

lord shiva statue
अमेरिकी संग्रहालय मेें रखी भारत से चुराई दो मूर्तियां वापस मिली

नई दिल्ली। अमेरिकी संग्रहालय में रखी भारत से चुराई गई 12वीं सदीं की दो बेशकीमती मुर्तियों को अमेरिका ने लौटा दी है। ये दोनों मूर्तियां वहां से दो अलग-अलग संग्रहालयों में रखी थी। दोनों मूर्तियां मंगलवार को न्यूयार्क में वाणिज्य दूतावास में एक कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती को मैनहट्टन जिला आर्टनी साइरस वेंस जूनियर ने सौंपीं। चक्रवर्ती ने इस प्रयास की सराहना की है। पहली मूर्ति लिंगोधभवमूर्ति 12 वीं सदी की है।

America Returned Indias Two Historical Statue Which Was Stolen :

बता दें कि भगवान शिव की ग्रेनाइट से निर्मित यह ऐतिहासिक मूर्ति चोल काल की है। फिलहाल आज के समय में इसकी कीमत 225,000 डॉलर आंकी गई है। इस बेशकीमती मूर्ति को तमिलनाडु से चुराया गया था और अलबामा के बर्मिंघम संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया था।

वहीं दूसरी मूर्ति बोधिसत्व मंजूश्री की मूर्ति है। उसके हाथ में तलवार है और मूर्ति सोने के रंग में रंगी है। जानकारों की मानें तो 12वीं सदी की यह फिलाइट मूर्ति 1980 के दशक में बिहार में बोधगया के समीप के एक मंदिर से चुराई गई थी। वर्तमान इसकी कीमत करीब 275,000 डॉलर आंकी गई है। इसे उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय के आकलैंड आर्ट संग्रहालय से हासिल किया गया है।

नई दिल्ली। अमेरिकी संग्रहालय में रखी भारत से चुराई गई 12वीं सदीं की दो बेशकीमती मुर्तियों को अमेरिका ने लौटा दी है। ये दोनों मूर्तियां वहां से दो अलग-अलग संग्रहालयों में रखी थी। दोनों मूर्तियां मंगलवार को न्यूयार्क में वाणिज्य दूतावास में एक कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती को मैनहट्टन जिला आर्टनी साइरस वेंस जूनियर ने सौंपीं। चक्रवर्ती ने इस प्रयास की सराहना की है। पहली मूर्ति लिंगोधभवमूर्ति 12 वीं सदी की है।बता दें कि भगवान शिव की ग्रेनाइट से निर्मित यह ऐतिहासिक मूर्ति चोल काल की है। फिलहाल आज के समय में इसकी कीमत 225,000 डॉलर आंकी गई है। इस बेशकीमती मूर्ति को तमिलनाडु से चुराया गया था और अलबामा के बर्मिंघम संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया था।वहीं दूसरी मूर्ति बोधिसत्व मंजूश्री की मूर्ति है। उसके हाथ में तलवार है और मूर्ति सोने के रंग में रंगी है। जानकारों की मानें तो 12वीं सदी की यह फिलाइट मूर्ति 1980 के दशक में बिहार में बोधगया के समीप के एक मंदिर से चुराई गई थी। वर्तमान इसकी कीमत करीब 275,000 डॉलर आंकी गई है। इसे उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय के आकलैंड आर्ट संग्रहालय से हासिल किया गया है।