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चीन की OBOR परियोजना पर भारत के पक्ष में खड़ा नजर आया अमेरिका

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फ‍िर चीन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को लेकर पाक को सख्‍त चेतावनी दी है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यदि पाकिस्‍तान इस समझौते पर अपने कदम पीछे नहीं खींचता तो इसके गंभीर नतीजे होंगे।

यह ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (CPEC) पकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। OBOR चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका मकसद एशियाई देशों,अफ्रीका, चीन और यूरोप के बीच सड़क संपर्क को बेहतर करना है।

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका की प्रधान उप विदेश सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने एक कार्यक्रम में कहा, “हम उन परियोजनाओं पर भारत की चिंता को साझा करते हैं, जिनका कोई आर्थिक आधार नहीं है और जिससे उसकी संप्रभुता पर प्रभाव पड़ेगा।”

वेल्स ने कहा कि चीन अपने इस अरबों डॉलर के महत्वाकांक्षी के लिए पाकिस्तान को गैर-रियायती लोन दे रहा है। वहीं, चीनी कंपनियां अपने मजदूरों को और सामान को पाकिस्तान में भेज रही है। इससे पाकिस्तान के भीतर बेरोजगारी का खतरा बढ़ रहा है।

अमेरिकी सहायक मंत्री के मुताबिक कि अगर पाकिस्तान चीन को कर्ज चुकाने में देरी करता है तो उसके आर्थिक विकास पर खासा असर पड़ेगा। साथ ही इससे प्रधानमंत्री इमरान खान का देश में रिफॉर्म्स का एजेंडा भी प्रभावित होगा।

वेल्स ने कहा कि चीन का सीपीईसी अलग प्रकार का है। हमने दुनियाभर में देखा है कि अमेरिकी कंपनियों के मॉडल सफल रहे हैं, क्योंकि हम पैसे को तरजीह नहीं देते हैं। हम मूल्यों, प्रक्रिया और विशेषज्ञता पर काम करते हैं।

साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका के कई कंपनियों मसलन उबर, एक्सॉन मोबिल, प्सिको ने पाकिस्तान में करीब 1.3 बिलियन डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ भारतीय रुपेय) का निवेश किया है।

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