अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तोड़ा नाता

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तोड़ा नाता
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तोड़ा नाता

वाशिंगटन। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. मानवाधिकार परिषद में सुधार न होने की वजह से अमेरिका लंबे समय से बाहर होने की धमकी देता आया है। अमेरिका लंबे समय से 47 सदस्यीय इस परिषद में सुधार की मांग कर रहा था। ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों से किनारा कर चुका है। इससे पहले उसने पेरिस क्लाइमेट चेंज फिर ईरान परमाणु समझौते से बाहर होने का ऐलान किया था।

पिछले साल ही अमेरिका ने दिए थे संकेत

पिछले साल ही हेली ने यूएनएचआरसी पर इज़रायल को लेकर बुरी तरह से पक्षपाती होने के आरोप लगाए थे और कहा था कि अमेरिका इससे जुड़ी अपनी सदस्यता के बारे में सोच रहा है। आपको बता दें कि जिनेवा स्थित इस काउंसिल का गठन 2006 में हुआ था। तब से ही इसपर ऐसे आरोप लगते रहें कि मानवाधिकरों का गंभीर उल्लंघन करने वाले देशों को भी इसने सदस्यता दी है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष राजनयिक पोम्पिओ और हेली दोनों ने इसपर जोर दिया कि अमेरिका मानवाधिकारों की वकालत करने में सबसे आगे रहेगा।

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हालांकि, हेली और पोम्पिओ का कहना है कि लंबे समय तक परिषद में सुधार और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले राष्ट्रों की सदस्यता खत्म करने के प्रयासों के बाद अमेरिका ने यह फैसला लिया है। हेली ने कहा, ‘‘परिषद को मानवाधिकारों के प्रति गंभीर बनाने के लिए यह सुधार आवश्यक हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लंबे समय से मानवाधिकार परिषद मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों का संरक्षक रहा है और राजनीतिक भेदभाव का गढ़ बना रहा है। दुख की बात है कि अब यह साफ हो गया है कि सुधार की हमारी अपील नहीं सुनी जा रही है।’’

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डेढ़ साल बचा था अमेरिका का कार्यकाल

अमेरिका तीन साल के लिए इस 47 सदस्यीय परिषद का सदस्‍य था। हालांकि, उसका डेढ़ साल का कार्यकाल पूरा हो चुका था। पिछले हफ्ते ही खबर आई थी कि अमेरिका की परिषद में सुधार की मांगों को नहीं माना गया है। इसके बाद माना जा रहा था कि अमेरिका परिषद को छोड़ देगा। यूएन सचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अमेरिका के फैसले पर अफसोस जताया है।

यूएनएचआरसी क्या है?

इसका उद्देश्य दुनिया में मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर नजर रखना है। इसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की जगह 2006 में बनाया गया था। अमेरिका को छोड़कर 46 देश इसके सदस्य हैं। भारत अभी इसका सदस्य नहीं है, लेकिन चार बार (2006-07, 2007-10, 2011-14 और 2013-17 में) सदस्य रहा है। 2013 में चीन, रूस, सऊदी अरब, अल्जीरिया और वियतनाम को इसमें शामिल किए जाने पर मानवाधिकार समूहों ने इसकी आलोचना की थी।

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वाशिंगटन। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. मानवाधिकार परिषद में सुधार न होने की वजह से अमेरिका लंबे समय से बाहर होने की धमकी देता आया है। अमेरिका लंबे समय से 47 सदस्यीय इस परिषद में सुधार की मांग कर रहा था। ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों से किनारा कर चुका है। इससे पहले उसने पेरिस क्लाइमेट चेंज फिर ईरान परमाणु समझौते से बाहर होने का ऐलान…
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