पड़ताल में खुली पोल, यहां खुद बीमार हैं एम्बुलेंस

अमेठी। सूबे में इमरजेंसी मेडिकल सर्विस में एम्बुलेंस सर्विस रीढ़ का काम करती है लेकिन अभी इसकी हालत बेहद खराब है। वर्षो पहले शुरू हुई 102 एम्बुलेंस सर्विस आज कई समस्याओं से घिर चुका है।

Amethi Ambulance Sick :

पड़ताल में खुली पोल

अमेठी के शुकुलबाज़ार सीएचसी में तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस की व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है। हमारी पड़ताल में यहां एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल नजर आई है, जबकि सरकारी दावा है कि पूरे जनपद में चल रही एंबुलेंस आपातकालीन स्थिति में महज 15 से 20 मिनट के अंदर मरीज के घर पहुंचाती है।

एम्बुलेंस के हालात यह हैं कि यह गाड़ी अपने पहियों पर ना खड़ी होकर लोहे के जग पर खड़ी हैं। गाड़ियों की जर्जरता के हालात यह हैं कि इसमें हार्न छोड़कर सब कुछ बजता है। जनपद के एम्बुलेंस ड्राइवर भी इस बात को कबूल करते हैं कि कई गाड़ियां जर्जर हालत में हैं।

बोले जिम्मेदार-

इस बाबत जब मुख्य चिकित्साधिकारी अमेठी से बात की गई तो उन्होंने एक टूक कहा कि इसकी जिम्मेदारी एक निजी संस्था(जीवीके) की है।

रिपोर्ट-राम मिश्रा

अमेठी। सूबे में इमरजेंसी मेडिकल सर्विस में एम्बुलेंस सर्विस रीढ़ का काम करती है लेकिन अभी इसकी हालत बेहद खराब है। वर्षो पहले शुरू हुई 102 एम्बुलेंस सर्विस आज कई समस्याओं से घिर चुका है। पड़ताल में खुली पोल अमेठी के शुकुलबाज़ार सीएचसी में तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस की व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है। हमारी पड़ताल में यहां एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल नजर आई है, जबकि सरकारी दावा है कि पूरे जनपद में चल रही एंबुलेंस आपातकालीन स्थिति में महज 15 से 20 मिनट के अंदर मरीज के घर पहुंचाती है। एम्बुलेंस के हालात यह हैं कि यह गाड़ी अपने पहियों पर ना खड़ी होकर लोहे के जग पर खड़ी हैं। गाड़ियों की जर्जरता के हालात यह हैं कि इसमें हार्न छोड़कर सब कुछ बजता है। जनपद के एम्बुलेंस ड्राइवर भी इस बात को कबूल करते हैं कि कई गाड़ियां जर्जर हालत में हैं। बोले जिम्मेदार- इस बाबत जब मुख्य चिकित्साधिकारी अमेठी से बात की गई तो उन्होंने एक टूक कहा कि इसकी जिम्मेदारी एक निजी संस्था(जीवीके) की है। रिपोर्ट-राम मिश्रा