अमेठी: भ्रष्टाचार ने जनपद में जमाई जड़ें

अमेठी: भ्रष्टाचार ने जनपद में जमाई जड़ें

अमेठी: भ्रष्टाचार एक भयंकर बीमारी है, जिसकी व्यापकता समाज और राष्ट्र के लिए घातक है यह हमारी जड़ों को खोखला करता जा रहा है। भ्रष्टाचार के विकराल होते चंगुल में फंस कर अमेठी की निरीह जनता आज कराह रही है। कल्याणकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार का घुन तो चाट ही रहा है, अन्नदाता की कमर भी टूट रही है।

अमेठी के ग्रामीणों ने ली कोर्ट की शरण-

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जनपद में आज अदने से कर्मचारी से लेकर कुछ भ्रष्ट उच्च पदासीन अफसरों तक सभी आकंठ भ्रष्टाचार में डूब चुके हैं और पैसे के फेर में उलझा प्रशासन भ्रष्टाचार की जड़ें काटने के बजाय उसके लिए उर्वरता की स्रोत बनती जा रही है ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त अमेठी का सपना आखिर कैसे साकार होगा।

ताजा तरीन उदाहरण में अमेठी के ग्राम सभा भुसहरी की प्रधान छबीला पत्नी राम बहोर ने प्रधानमंत्री आवास योजना मे एक ही लाभार्थी को नाम बदल कर दो बार लाभावित कर डाला मामले की शिकायत प्रशासन,शासन से ग्रामीणो ने किया लेकिन धांधली पर किसी को आच नहीं आयी ग्रामीणो ने न्यायालय की शरण ली और कोर्ट ने मामले की सुनवाई किया जिसमे प्रधान सहित दो के ख़िलाफ़ थाना संग्रामपुर मे मुकदमा दर्ज किया गया।

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अमेठी में आज भी खानाबदोश जिंदगी जीने के मजबूर है गोमती पार के ग्रामीण-

विद्वानों का मत है कि जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरुद्ध चलकर निज स्वार्थ की पूर्ति के लिए गलत आचरण करता है तब भ्रष्टाचार का जन्म होता है आज वही भ्रष्टाचार सभी आयामों में गहरी पैठ बना चुका है परिणाम यह है कि इसकी खतरनाक हवा से संपूर्ण समाज ही विषाक्त हो चुका है।

यही विषाक्तता मानवीय मूल्यों से खिलवाड़ करते हुए अमेठी को पतन के गर्त की ओर ले जा रही है मंचों पर भ्रष्टाचार मुक्त अमेठी का सपना दिखाने वाले लोग ही इसके संरक्षक बने हुए हैं।

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परिणाम यह है कि अमेठी में सड़क बनती है और कुछ ही महीने में उखड़ जाती है पुल, पुलिया, सरकारी भवन निर्माण के कुछ ही दिन में जर्जर हो जाते हैं सरकारी खरीद में सामग्री तो घटिया ली जाती है और भुगतान उच्च कोटि की सामग्री के मूल्य से अधिक किया जाता है।

दफ्तरों में बिना कुछ लिए बाबू फाइल आगे नहीं बढ़ाता साहब बिना तय किए स्वीकृति नहीं देते खसरा, खतौनी, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म, मृत्यु, जाति, निवास प्रमाणपत्र बिना पैसे के नहीं मिलते सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए धनाड्यों को बड़ी आसानी से न्यूनतम आय का प्रमाण पत्र मिल जाता है, और खानाबदोश जिंदगी जीने वाले चप्पल घिस कर भगवान भरोसे चुप बैठ जाते हैं जनपद के तराई क्षेत्र अढ़नपुर के तीन गाँव पूरे बुद्दी पूरे जबर, पीपर पुर के ग्रामीण आज भी बदहाली की जिंदगी जी रहे है ।

‘मुद्रा की माया’ के चलते नही ‘पलट रही काया’-

कोठी, कार, नौकरी, व्यापार वालों को गरीबी रेखा के नीचे और बेसहारों को ऊपर का राशन कार्ड दिया जाता है कोटेदार 25 किलो देकर 35 किलो राशन दर्ज करता है आवास, पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ उसे ही मिलता है जो बड़े पेट वालों के मुंह में मुद्रा का निवाला डालता है गरीब असमर्थता के चलते अपात्र हो जाता है ।

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…..और पंख फड़फड़ा रही निरीह जनता-

वर्तमान में बढ़ते भ्रष्टाचार ने लोकतंत्र की अस्मिता को आहत कर दिया है विलासिता पूर्ण जीवन की कामना ने मानवता की हत्या कर दी है अर्थ लोभ में लोग मानव जीवन की सार्थकता भूल गए हैं। नतीजा यह है कि पैसे की लालच में अपात्रों को पात्र और पात्रों को अपात्र करार देकर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्य से भटकाया जा रहा है। शासन-प्रशासन में बैठे कुछ लोग आजादी के मायने भूल गए हैं आज सभी जिम्मेदार लोग कायर, स्वार्थी और खुदगर्ज हो गए हैं और निरीह जनता पंख फड़फड़ा रही है।

रिपोर्ट@राम मिश्रा

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