अमेठी: प्रशासन की सह में धड़ल्ले से बिक रही है ‘अवैध शराब’

अमेठी। यूपी के अमेठी में अवैध शराब की बिक्री ज़ोरों पर है, प्रशासन को इस बात की खबर होते हुए भी कोई कार्यवाई नहीं हो रही है। शराब कारोबारियों और प्रशासन की मिली भगत से यह धंधा दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। जनपद में हॉटल और ढाबों में इन दिनों अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है ऐसा नहीं है कि यह बात पुलिस या आबकारी अमले के संज्ञान में नहीं है दोनों ही जिम्मेदार विभाग के कर्मचारी अनेकों बार वर्दी में ही इन ढाबों और हॉटलों में सोडे की डकारें और धुंए के छल्ले बनाते दिख जाते हैं।

देशी और विदेशी शराब अब तक बड़ी तादाद में पुलिस के द्वारा ही पकड़े जाने की बातें मीडिया में सामने आती रही हैं यह शोध का ही विषय है कि आखिर आबकारी विभाग के मूल काम को पुलिस के द्वारा अंजाम दिया जा रहा है और आबकारी विभाग नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहा है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय होगा कि अवैध शराब के बारे में सांसद-विधायकों को भी कोई लेना-देना नहीं है वही दूसरी ओर जनपद में आबकारी विभाग के कानों में जूं नहीं रेंग पा रही है।

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शराब सामाजिक बुराई है, यह बात सिद्ध हो चुकी है शराब से प्राप्त होने वाले भारी भरकम राजस्व से प्रदेश सरकार द्वारा अनेक योजनाओ का व्यय निकाला जाता है इसलिये शराब बंदी अब संभव प्रतीत नहीं होती है यक्ष प्रश्न यह है कि अवैध शराब के जरिये कौन सा राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है? आज भी शाम ढलते ही जिले में मयजदों की टोलियां लहराती हुईं दिखायी दे जाती हैं चौक-चौराहों,अण्डों के ठेलों आदि पर मयजदों को डकारें मारते आसानी से देखा जा सकता है जिला मुख्यालय में शाम ढलने के बाद कोतवाली पुलिस की पेट्रोलिंग भी अब दिखायी नहीं पड़ती।

जिले का शायद ही कोई ऐसा ढाबा हो जिसमें शराब अवैध रूप से न बिक रही हो या जिस ढाबे में दिन या रात में सुरापान करते हुए लोगों को न देखा जाता हो यक्ष प्रश्न यही है कि इस तरह से अगर बिना किसी लाईसेंस के ढाबों में शराब परोसी जा रही है तो इस नियम विरूद्ध काम को आबकारी विभाग रोकने की कवायाद क्यों नहीं करता है!

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संवेदनशील जिलाधिकारी महोदया शकुन्तला गौतम से जनापेक्षा है कि हॉटल, ढाबों सहित अन्य स्थानों पर बिक रही अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिये आबकारी विभाग को पाबंद किया जाये ताकि लोगों के घर बच सकें। साथ ही अगर कभी मिलावटी या जहरीली शराब किसी ने बेची और कहीं कोई हादसा हुआ तो यह नया सिरदर्द प्रशासन के सिर ही होगा।

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