अदालत का आदेश बेमानी, मानक में जमकर मनमानी

अमेठी: देश भर में अमेठी ही इकलौता ऐसा जिला होगा जहाँ स्कूली परिवहन में लगे वाहनों पर हेल्प लाईन नंबर नहीं लिखा जाता है। देश के प्रत्येक शहर में स्कूली वाहनों को परिवहन विभाग और सर्वाेच्च न्यालयालय के द्वारा दी गयी गाईड लाईन के आधार पर ही संचालित किया जाता है। महानगरों में तो शालेय परिवहन में लगे पीले रंग से पुते वाहनों में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है कि चालक अगर रश ड्राईविंग (तेज वाहन चला रहा हो) तो इन नंबर पर तत्काल ही सूचित करें।

शीर्ष अदालत ने जारी किया है दिशा निर्देश-

{ यह भी पढ़ें:- अमेठी: बियर लदी ट्रक पलटी, मच गई लूट }

देश में स्कूली वाहनों में होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर देश की शीर्ष अदालत के द्वारा भी अनेक बार चेताया गया है और दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। इन दिशा निर्देशों के पालन में सख्ती बरतने की नसीहतें भी राज्य सरकारों को दिये जाने के बाद वैसे नतीजे सामने नहीं आ पा रहे हैं जिनकी उम्मीद की जा रही थी।

अमेठी जिले में स्कूली परिवहन में लगे वाहनों में से अधिकांश ऑटो और छोटा हाथी वाहन पीले रंग में रंगे हुए नहीं हैं। विद्यालय द्वारा खुद के क्रय किये गये वाहन अवश्य ही पीले रंग में दिख जाते हैं इन वाहनों पर स्कूली परिवहन वाहन लिखा जाना चाहिये, जो कि कम ही वाहनों में देखने को मिलता है।

{ यह भी पढ़ें:- निजी विद्यालयों की बढ़ती मनमानी, डीएम के आदेश की नाफरमानी }

भेड़ बकरियों की तरह ठूस-ठूस भरे जा रहे बच्चे-

सबसे आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि स्कूली परिवहन में लगे वाहनों में कहीं भी हेल्प लाईन नंबर नहीं लिखा जाता है परिवहन विभाग हो या यातायात पुलिस, किसी ने भी इस दिशा में अब तक शायद न तो सोचा है और न ही कार्यवाही की जहमत उठायी है इसके परिणाम स्वरूप जिले में स्कूली परिवहन में मनमानी बदस्तूर जारी है। एक ऑटो या छोटा हाथी में जिस तरह से भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर बच्चे बैठाये जाते हैं वह वाकई निंदनीय ही माना जायेगा ।

मौन हो गया है ‘भाषा की सीख’ देने वाला विभाग-

{ यह भी पढ़ें:- सवालों के घेरे में 'सरकार की समझदारी', समस्याओं का सिर्फ हो रहा स्थानांतरण }

देखा जाये तो यह बच्चों की सुरक्षा के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ ही है बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने की जवाबदेही जनपद के शिक्षा विभाग के कंधों पर ही होती है इसके साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा आदि की जवाबदेही भी शिक्षा विभाग की है इसके बाद भी इस मामले शिक्षा विभाग मौन हैं।

इनसे है जनपेक्षा-

संवेदनशील जिलाधिकारी महोदया शकुन्तला गौतम से जनापेक्षा है कि जिले भर में स्कूली परिवहन में लगे वाहनों को चिन्हित किया जाकर उन सभी वाहनों पर स्थानीय हेल्प लाईन नंबर अवश्य ही लिखवाये जायें ताकि दुर्घटना या गलत वाहन चालन की दशा में देखे जाने पर कोई भी इस नंबर पर सूचित कर व्यवस्था के सुचारू संचालन की दिशा में मदद कर सके।

रिपोर्ट-राम मिश्रा

{ यह भी पढ़ें:- सावधान: यहां भी लग सकता 'सांस का आपातकाल', दिल्ली की राह पर 'अमेठी' }

Loading...