नवजात शिशुओ का शव और संवेदनहीनता, आधुनिकता पर चढ़ाए संस्कारों का आवरण!

अमेठी। अमेठी जिले में नवजात शिशुओं के शव मिलने की घटनाओं का बढ़ोत्तरी होना चिंताजनक ही माना जा सकता है किसी का जीवन समाप्त करने का हक भारत गणराज्य के कानून में किसी को भी नहीं दिया गया है। अपराधियों के लिए मौत की या फांसी की सजा इसमें अपवाद मानी जा सकती है नवजात शिशुओं को जन्म कहीं न कहीं तो दिया ही गया होगा!

जिले की सीमा में अगर नवजात के शव मिल रहे हैं, तो संभावना यह भी बलवती होती है कि उसे इसी जिले में इस धरती पर लाया गया होगा इसके लिए नर्सिंग होम्स या चिकित्सकों को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है कहने को तो नर्सिंग होम्स में गर्भपात को अवैध बताने वाले बोर्ड चस्पा होते हैं बावजूद इसके इन नर्सिंग होम्स में धडल्ले से गर्भपात की खबरें आम हुआ करती हैं जिले में ही अनेक जगहों पर अवैध गर्भपात की खबरें मिल जाती हैं सालो पहले गर्भपात के लिए कुछ एक संस्था या नर्सिंग होम का ही नाम जिले में सामने आता था।

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आज विचारणीय प्रश्न यह है कि आखिर क्या वजह है कि नवजात शिशुओं के शव मिलने का सिलसिला थम ही नहीं पा रहा है अभी कल ही अमेठी चौराहे के पास पुल के नीचे एक शिशु का शव मिला था हाल ही में शिवरतनगंज में एक शिशु का शव और उसके उपरांत एक बार फिर इन्हौना में ही पालीथिन में एक बच्चे का शव मिला है यह निश्चित तौर पर अच्छी परंपरा का आगाज कतई नहीं माना जा सकता है। जिले में इस तरह की घटनाओं के बारे में विचार करने की जरूरत है विशेषकर पालकों को इस मामले में विचार करना ही होगा।

सरकार भी करे विचार-अश्लील न हो प्रचार

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दरअसल, अधकचरी पाश्चात्य संस्कृति के चलते युवा नग्नता की अंधी सुरंग में घुसता ही चला जा रहा है वह इसके दूसरे मुहाने के दलदल से अनजान ही है, किन्तु वर्तमान में उसके लिए यह एक खिलवाड़ की तरह ही है आज के इस परिवेश के लिए काफी हद तक टीवी और मोबाईल को ही जिम्मेदार माना जा सकता है। आधुनिक दिखने की जुगत में युवा तेजी से नग्नता को अंगीकार करते जा रहे हैं हो वाकई मेें चिंताजनक बात ही मानी जा सकती है।

टीवी पर दिखाए जाने वाले सीरियल्स और अश्लील विज्ञापनों का बुरा प्रभाव आज की युवा पीढ़ी पर पड़े बिना नहीं है अश्लील विज्ञापनों में कभी पिघली चाकलेट खाते नर नारी को एक दूसरे की ओर आकर्षित होते दिखाया जाता है तो कभी किसी बडी स्प्रे से बाला को आकर्षित होते दिखाया जाता है क्या यह सब भारतीय समाज और संस्कृति के लिए उचित है? जाहिर है यह सब कुछ पूर्व के बजाए पाश्चयत्य संस्कृति के अनुरूप माना जा सकता है। फिर क्या वजह है कि भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा इस तरह के प्रसारण को अवैध करार देकर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है? ।

मोबाइल से ‘अश्लील मनोरंजन’ कर रहे युवा

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अमेठी जिले में भी अश्लीलता का चलन जोरों पर है युवाओं की जिद पर उनके पालकों द्वारा उन्हें मोबाईल तो दिला दिए जाते हैं पर क्या कभी किसी पालक ने अपने यौवन की दहलीज पर कदम रखने वाले बच्चे के मोबाईल के अंदर झांककर देखा है? इसका उत्तर नकारात्मक ही ज्यादा आएगा युवाओं के मोबाईल में अश्लील सामग्रियों की भरमार हुआ करती है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है अमेठी जिले में अवैध रूप से मोबाईल में डाले जाने वाले गाने वीडियो आदि का कारोबार जोर शोर से चल रहा है।

निर्जन स्थानों पर युवक युवतियों को अश्लील हरकतें करते देख उमर दराज लोग भी शरमा जाते हैं इन युवाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अगर इन्हें कोई रोकता है तो ये उस पर टूट पड़ते हैंपुलिस भी रस्म अदायगी के लिए इन युगलों को पकड़ने की जहमत नहीं उठाती है ।

‘पालको की अनदेखी’ से फैलती गन्दगी

युवा कच्ची मिट्टी के समान होता है उस जिस रूप में ढाल दिया जाए वह आसानी से ढल जाता है पालकों की अनदेखी और समाज में फैली गंदगी की परिणिती के रूप में इस तरह के नवजात शिशु ही सामने आते हैं सामाज से छिपकर अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को पाप समझकर उससे छुटकारा पाने के चक्कर में युवतियां इस तरह की घटनाओं को अंजाम देती हैं, और इस पाप में वे चिकित्सक या पैरामेडीकल स्टाफ बराबरी का भागीदार है जो यह करवाता है।

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रिपोर्ट-राम मिश्रा

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