मंजर :11 कब्र खोदने वालों के भी छलक उठे आंसू

अमेठी। जिस घर से एक दिन में 11 लोगों के जनाजे उठें होंगे, जरा सोचिये क्या मंजर रहा होगा, यह बात सिर्फ सोच कर ही रूह कांप जा रही है। जिसने यह मंजर देखा होगा उस पर क्या गुज़री होगी। ऐसा ही मंजर यूपी के अमेठी जिले में देखने को मिला, मौके पर मौजूद हर आदमी की आंखें नम थीं। यही नहीं, आए दिन कब्रें खोदने वालों के लिए इन 11 जनाजों को दफनाने के लिए कब्र खोदना आसान नहीं था, उनकी आंखें भी आंसुओं से डबडबा रहीं थीं।




परिवार के नाम पर बस एक महिला सदस्य जिंदा बची—

दरअसल, पूरा मामला अमेठी जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर महोना गांव का है। जहां गुरुवार की तडके सुबह उस समय कोहराम मच गया था जब यहां एक ही परिवार के 11 लोगों के शव मिले। जिनमें दस लोगों की गला रेतकर हत्या की गई थी जबकि परिवार के मुखिया जमालुदृदीन का शव घर में ही फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। घर में सिर्फ जमालुद्दीन की पत्नी ही जिन्दा बची है।

गांववालों के साथ-साथ पुलिस के लिए भी यह हादसा अभी भी अबूझ पहेली ही बना हुआ है। गुरुवार देर शाम भारी पुलिस फोर्स की निगरानी में जामा मस्जिद जगदीशपुर के पेश इमाम ने जनाजे की नमाज पढ़ाई और फिर लाशों को दफ्नाया गया।




सीएचसी जगदीशपुर में एडमिट जमालुद्दीन की पत्नी जाहिदा और बेटी अफसर बानो ने आईजी जोन, कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसपी की मौजूदगी में बयान दिए। जिसे अभी डिस्क्लोज नहीं किया गया है।

हालांकि पुलिस का कहना है कि जमालुद्दीन ने खुद ही पूरे परिवार की हत्या की है। उसने पहले परिवार के हर सदस्य को नशीली दवा पिलाई और उसके बाद एक एक कर सभी का गला रेतकर खुद को फांसी के फंदे पर लटका लिया।




पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खा रही पुलिस की थ्यौरी—

पहला सवाल — जमालुद्दीन पर 10 लोगों के कत्ल का इल्जाम था, लेकिन पीएम रिपोर्ट में उसके शरीर पर खून के एक भी धब्बे क्‍यों नहीं मिले?

दूसरा सवाल— क्या जमालुद्दीन ने ग्लफ्स पहनकर सभी को मौत के घाट उतारा था ? अगर ऐसा है तो घटनास्‍थल से ग्‍लफ्स क्‍यों नहीं मिले।

तीसरा सवाल— जमालुद्दीन कोई पेशेवर शातिर अपराधी नहीं था, तो फिर इतनी सफाई से वारदात को अंजाम कैसे दिया ?

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