चीन-पाकिस्तान की बढ़ती सांठगांठ से रॉ हुआ चौकन्ना, अरब सागर में बढ़ाई चौकसी

imran
चीन-पाकिस्तान की बढ़ती सांठगांठ से रॉ हुआ चौकन्ना, अरब सागर में बढ़ाई चौकसी

नई दिल्ली। अरब सागर में चीन और पाकिस्तान की सांठगांठ के बढ़ते प्रभाव पर शिकंजा कसने की कोशिश में भारत की रॉ (RAW) समुद्री खुफिया तंत्र को मजबूत बना रही है। एजेंसी अरब सागर क्षेत्र को लेकर ज्यादा चौकस है। वर्तमान आरएडब्ल्यू चीफ सामंत गोयल चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ हैं और उनको एजेंसी में 18 साल का अनुभव है। वह अरब सागर में अब भारत की चौकसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

Amid Growing Influence Of China Pakistan Nexus In The Indian Ocean R Aw Is Bolstering Its Maritime :

माले में बन गया था ISI का विदेशी केंद्र

आठ महीने महले मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में मालदीव की राजधानी माले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का विदेशी केंद्र बन गया था। बता दें कि अब्दुल्ला यामीन और इब्राहिम मोहम्मद सालेह मालदीव के दो शीर्ष नेता हैं। अब्दुल्ला यामीन को चीन तो इब्राहिम मोहम्मद को भारत समर्थक माना जाता है। फिलहाल इब्राहिम मोहम्मद सालेह मालदीव के राष्ट्रपति हैं।

आईएसआई को मालदीव में उसकी मौजूदगी बढ़ाने में मदद की। यामीन के कार्यकाल में माले के लिली मागू इलाके में स्थित पाकिस्तानी दूतावास आईएसआई का विदेशी केंद्र बन गया था, जहां से भारत के खिलाफ साजिश रची जा रही थी। दरअसल, पाकिस्तान के राजदूत ने बीजिंग को यामीन के साथ करीबी रिश्ता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

भारत समर्थक नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने चीन का किया था विरोध

यामीन के खिलाफ हवा का रुख मोड़ने के लिए भारत समर्थक नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पिछले साल चुनाव में चीन विरोधी रुख अपनाया और वह अपने अभियान में सफल रहे। सूत्रों ने बताया कि सोलिह के सत्ता में आने के बाद मालदीव में आईएसआई का प्रभाव धीरे-धीरे शिथिल पड़ गया। मालदीव के अलावा, रॉ की भी सेशेल्स और मॉरीशस के इर्द-गिर्द चीनी पोतों पर अपनी नजर बनी हुई है।

रॉ के नए प्रमुख सामंत गोयल को हैं 18 साल का अनुभव

रॉ के नए प्रमुख सामंत गोयल चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ हैं और उनको एजेंसी में 18 साल का अनुभव है। वह अरब सागर में अब भारत की चौकसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी गोयल के बारे में माना जाता है कि वह अजित डोभाल के करीबी हैं और इस साल बालाकोट एयर स्ट्राइक की योजना बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

रॉ के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी ने बताया, “उच्च पदस्थ डोभाल के करीबी सहयोगी सामंत मेधावी अधिकारी हैं और वह एजेंसी को एक नई पेशेवराना बुलंदी पर ले जा सकते हैं। जहां तक हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाने की बात है तो रॉ अपने मकसद में कामयाब होने के लिए बिल्कुल सक्षम है।”

नई दिल्ली। अरब सागर में चीन और पाकिस्तान की सांठगांठ के बढ़ते प्रभाव पर शिकंजा कसने की कोशिश में भारत की रॉ (RAW) समुद्री खुफिया तंत्र को मजबूत बना रही है। एजेंसी अरब सागर क्षेत्र को लेकर ज्यादा चौकस है। वर्तमान आरएडब्ल्यू चीफ सामंत गोयल चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ हैं और उनको एजेंसी में 18 साल का अनुभव है। वह अरब सागर में अब भारत की चौकसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। माले में बन गया था ISI का विदेशी केंद्र आठ महीने महले मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में मालदीव की राजधानी माले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का विदेशी केंद्र बन गया था। बता दें कि अब्दुल्ला यामीन और इब्राहिम मोहम्मद सालेह मालदीव के दो शीर्ष नेता हैं। अब्दुल्ला यामीन को चीन तो इब्राहिम मोहम्मद को भारत समर्थक माना जाता है। फिलहाल इब्राहिम मोहम्मद सालेह मालदीव के राष्ट्रपति हैं। आईएसआई को मालदीव में उसकी मौजूदगी बढ़ाने में मदद की। यामीन के कार्यकाल में माले के लिली मागू इलाके में स्थित पाकिस्तानी दूतावास आईएसआई का विदेशी केंद्र बन गया था, जहां से भारत के खिलाफ साजिश रची जा रही थी। दरअसल, पाकिस्तान के राजदूत ने बीजिंग को यामीन के साथ करीबी रिश्ता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। भारत समर्थक नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने चीन का किया था विरोध यामीन के खिलाफ हवा का रुख मोड़ने के लिए भारत समर्थक नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पिछले साल चुनाव में चीन विरोधी रुख अपनाया और वह अपने अभियान में सफल रहे। सूत्रों ने बताया कि सोलिह के सत्ता में आने के बाद मालदीव में आईएसआई का प्रभाव धीरे-धीरे शिथिल पड़ गया। मालदीव के अलावा, रॉ की भी सेशेल्स और मॉरीशस के इर्द-गिर्द चीनी पोतों पर अपनी नजर बनी हुई है। रॉ के नए प्रमुख सामंत गोयल को हैं 18 साल का अनुभव रॉ के नए प्रमुख सामंत गोयल चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ हैं और उनको एजेंसी में 18 साल का अनुभव है। वह अरब सागर में अब भारत की चौकसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी गोयल के बारे में माना जाता है कि वह अजित डोभाल के करीबी हैं और इस साल बालाकोट एयर स्ट्राइक की योजना बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है। रॉ के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी ने बताया, "उच्च पदस्थ डोभाल के करीबी सहयोगी सामंत मेधावी अधिकारी हैं और वह एजेंसी को एक नई पेशेवराना बुलंदी पर ले जा सकते हैं। जहां तक हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाने की बात है तो रॉ अपने मकसद में कामयाब होने के लिए बिल्कुल सक्षम है।"