अमिताभ ठाकुर ने सतर्कता निदेशक के खिलाफ सीजेएम को दायर किया परिवाद      

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोल देने वाले निलंबित आईपीएस अधिकारी  अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को सतर्कता निदेशक भानु प्रताप सिंह, एसपी सीआईएस घनश्याम चौरसिया तथा अन्य सतर्कता अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दायर किया है। उन्होने इन लोगों द्वारा खुद को क्षति कारित करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ खुली जाँच में फर्जी और अशुद्ध अभिलेख रचने का आरोप लगाया है। उन्होने इस सम्बन्ध में धारा 156(3) सीआरपीसी में सीजेएम लखनऊ हितेंद्र हरी के समक्ष परिवाद दायर किया।  

सीजेएम ने परिवादी से एसएसपी द्वारा शिकायत प्राप्त हो जाने की स्थिति ज्ञात करने को कहा और कल (12 अक्टूबर) को पुनः सुनवाई की तारीख लगाई।

अपनी शिकायत में ठाकुर ने कहा कि निदेशक सिंह के अधीन सतर्कता अधिष्ठान ने जानबूझ कर फर्जी तरीके से उनकी परिसंपत्ति रु० 2.16 करोड़ बता दी जबकि इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेशों पर उन्हें प्राप्त कराये गए उनकी कथित संपत्ति की सूची में 15 में 14 संपत्ति उनकी नहीं है और मात्र एक संपत्ति ही उनकी है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि सिंह ने यह कार्य अपने राजनैतिक आका मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खुश करने को किया। इसे धारा 166, 167, 214, 120बी आईपीसी के तहत अपराध बताते हुए ठाकुर ने एफआईआर की मांग की थी।

उन्होंने 09 अक्टूबर को एसओ विभूति खंड ओपी तिवारी को प्रार्थनापत्र दिया था और तिवारी ने एफआईआर की प्रति लेने से साफ़ मना कर दिया था। ठाकुर ने प्रार्थनापत्र रिसीव कर एफआईआर लिखने को धारा 154(1) सीआरपीसी तथा जनहित गारंटी एक्ट में अपना अधिकार बताते हुए थानाध्यक्ष द्वारा ऐसा नहीं करने पर इस मामले को 154(3) सीआरपीसी में एफआईआर लिखने और थानाध्यक्ष विभूतिखंड के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए 10 अक्टूबर को एसएसपी लखनऊ को पत्र भेजा था।

 

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