AMU के प्रोफेसर ने पत्नी को Whats App पर दिया तलाक

AMU के प्रोफेसर ने पत्नी को Whats App पर दिया तलाक

लखनऊ। एक ​शिक्षित व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह अपने देश की अदालत का सम्मान करेगा और पालन करेगा। अगर मामला किसी शिक्षक से जुड़ा हुआ हो तो उसके लिए कानून का पालन करना और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि एक शिक्षक के कंधों पर समाज के उत्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक प्रोफेसर ने 20 साल की शादीशुदा जिन्दगी के बाद अपनी पत्नी को व्हाट्स एप्प (Whats App) पर तलाक बोलकर अपना रिश्ता खत्म कर दिया। प्रोफेसर साहब ने यह कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी ताक पर चढ़ा दिया।

मामला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के प्रोफेसर खालिद बिन युसूफ खान और उनकी पत्नी यास्मीन के बीच का है। प्रोफेसर खालिद एएमयू में संस्कृत विभाग के चेयरमैन हैं और उनकी गिनती विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसरों में की जाती है। यास्मीन का आरोप है कि उनके शौहर ने व्हाट्स एप्प के जरिए तलाक भेजकर रिश्ते को खत्म कर दिया और उन्हें उनके तीन बच्चों के साथ घर से बाहर निकाल कर दर दर भटकने को मजबूर कर दिया है। जिसके विरोध में यास्मीन ने एएमयू कैंपस के भीतर वाइस चांसलर तारिक मंसूर के कार्यालय के बाहर हाई बोल्टेज ड्रामा कर न्याय के लिए गुहार लगाई और धमकी दी कि अगर 11 दिसंबर तक उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह अपने तीन बच्चों के साथ वाइस चांसलर के आवास के सामने खुदकुशी कर लेगी।

{ यह भी पढ़ें:- 'तीन तलाक' के खिलाफ जीत कर भी अपनों से हार गयी 'इशरत जहां' }

पत्नी के लगाए आरोपों के जवाब में प्रोफेसर खालिद ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप सरासर गलत है। उन्होंने व्‍हाट्स एप्प और एसएमएस के जरिए तलाक देने के बाद शरिया के मुताबिक निर्धारित समयावधि के भी भीतर दो लोगों की मौजूदगी में मौखिक रूप से भी तलाक दिया था। अब निर्धारित तारीख को तीसरी बार तलाक बोलकर यास्मीन के साथ अपने रिश्ते को खत्म करेंगे।

प्रोफेसर खालिद ने इस मामले में एक पीड़ित की तरह अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले 20 सालों से यास्मीन उनका उत्इस मामले में खुद को पीडि़त बताते हुए प्रोफेसर खालिद ने कहा कि मैं नहीं बल्कि मेरी पत्‍नी पिछले 2 दशकों से मेरा उत्‍पीड़न कर रही है। शादी के समय से ही यास्मीन और उसके परिवार ने वास्तविकता को छुपाया था, शादी के समय कहा गया था कि वह ग्रेजुएट है, लेकिन बाद में पता चला किए ग्रेजुएट नहीं है। जिसका जवाब देते हुए यास्मीन ने कहा कि वह ग्रेजुएट नहीं एएमयू से ही एमए और बीएड की डिग्री ले चुकी है।

{ यह भी पढ़ें:- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी नहीं माने मियां, बेगम को दे डाला तलाक }

विश्वविद्यालय कैंपस के भीतर हुए इस हंगामे के बीच मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रोफेसर खालिद को समझाबुझा कर यास्मीन को घर के भीतर दाखिल करवा दिया है और इस मामले को काउंसिलिंग के माध्यम से निपटाने का प्रयास करने की बात कही है। पुलिस का कहना है कि यास्मीन की ओर से किसी प्रकार का मामला दर्ज नहीं करवाया गया है, इसलिए इस मामले में किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

Loading...