अनामिका शुक्ला केस: फर्जी टीचरों को दी जाती थी सिर्फ आधी सैलरी, तो फिर आधा पैसा जाता कहां था?

    Anamika Shukla
    अनामिका शुक्ला केस: फर्जी टीचरों को दी जाती थी सिर्फ आधी सैलरी, तो फिर आधा पैसा जाता कहां था?

    यूपी के अनामिका शुक्ला केस में आये दिन शिक्षा विभाग में पनपे भ्रष्टाचार की पोल खुलती चली जा रही है। असली अनामिका बेरोजगार घूम रही थी और उसकी जगह पर दर्जनो जगह फर्जी अनामिका नौकरी कर रही थी। जबसे मामला सामने आये है तभी से रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अंबेडकर नगर में अनामिका शुक्ला के नाम पर विज्ञान पढ़ा रही शिक्षिका अनीता से जब पुलिस ने पूछताछ की तो एक नया खुलासा हुआ जिसने आधिकारियों को चौका दिया है। अनीता ने बताया कि उसे सैलरी नगद मिलती थी। 22 हजार प्रतिमाह मानदेय पर उसकी नियुक्ति हुई थी लेकिन उसे 10 हजार रुपये कैश सैलरी के रूप में मिलते थे। उसेे सैलरी नौकरी लगवाने वाला राज नाम का शख्स ही देता था।

    Anamika Shukla Case Only Half The Salary Was Given To Fake Teachers So Where Did Half The Money Go :

    अनीता ने बताया कि बचे मानदेय के लिए उसने राज को कई बार फोन भी किया मगर उसने फोन रिसीव नहीं किया। अनीता के इस खुलासे के बाद आधिकारियों ने बताया कि हो सकता है फर्जी टीचरों की नियुक्ति के बाद राज टीचरों को आधी सैलरी ही देता रहा हो। अधिकारियों के मुताबिक, राज की गिरफ्तारी के बाद ही सैलरी से जुड़ी सच्चाई पता चल सकेगी।

    बीए फेल हेडमास्टर का छोटा भाई पुष्पेंद्र उर्फ राज उर्फ नीटू ही शिक्षिका फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें ताबड़तोड़ दबिशें दे रही है। मैनपुरी से कासगंज पुलिस ने गुरुवार को जसवंत उर्फ विभव को गिरफ्तार किया था। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। वो कन्नौज के एक प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर के पद पर तैनात था। पूछताछ में उसने कबूला कि उसने बीए द्वितीय वर्ष तक ही पढ़ाई की है। इसके बाद छोटे भाई पुष्पेंद्र के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया और विभव के नाम से कन्नौज के स्कूल में तैनाती ले ली। उससे मिले सुराग के आधार पर पुलिस की टीमें जहां-तहां दबिश दे रही है।

    उधर अंबेडकरनगर पुलिस को वहां अनामिका शुक्ला के नाम से तैनात शिक्षिका का पता चला तो उसने मैनपुरी से कनेक्शन खोजना शुरू किया। सभी संदिग्धों से पूछताछ के बाद मैनपुरी के बेवर में रहने वाली विधवा अनीता का खुलासा हुआ। इसके बाद बेवर पुलिस की मदद से अंबेडकरनगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और ले गई।

    वहीं गोंडा में जिस अनामिका शुक्ला ने खुद के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रदेश में फर्जी टीचरों की नियुक्ति का दावा किया था उसे एक एडेड स्कूल प्रबंधक ने नौकरी दे दी है। भैय्या चंद्रभान दत्त स्मारक विद्यालय रामपुर टेंगरहा के प्रबंधक दिग्विजय पाण्डेय ने अनामिका शुक्ला को अपने स्कूल के प्राथमिक अनुभाग में सहायक अध्यापिका के पद पर अस्थाई नौकरी दी है। शुक्रवार को सौंपे गए नियुक्ति पत्र में छात्रों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की कमी का हवाला दिया गया है।विद्यालय के प्रबंधक श्री पाण्डेय ने बताया नौकरी शासन की गाइडलाइन के मुताबिक वेतनमान के आधार पर दी गई है। अनामिका शुक्ला को नौकरी ज्वाइन करने के लिए तीन दिन का मोहलत दी गई है।

     

    बीएसए ने भी दिया नौकरी का ऑफर : अनामिका शुक्ला ने बीएसए दफ्तर पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाई और खुद को बेरोजगार बताते हुए उसके शैक्षिक अभिलेखों का दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने उसे नौकरी का ऑफर दिया। बीएसए ने कहा कि जब कस्तूरबा विद्यालय में भर्ती निकलेगी तो फार्म जरूर भरिए, हाई मेरिट होने के कारण नौकरी लग जाएगी।

    यूपी के अनामिका शुक्ला केस में आये दिन शिक्षा विभाग में पनपे भ्रष्टाचार की पोल खुलती चली जा रही है। असली अनामिका बेरोजगार घूम रही थी और उसकी जगह पर दर्जनो जगह फर्जी अनामिका नौकरी कर रही थी। जबसे मामला सामने आये है तभी से रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अंबेडकर नगर में अनामिका शुक्ला के नाम पर विज्ञान पढ़ा रही शिक्षिका अनीता से जब पुलिस ने पूछताछ की तो एक नया खुलासा हुआ जिसने आधिकारियों को चौका दिया है। अनीता ने बताया कि उसे सैलरी नगद मिलती थी। 22 हजार प्रतिमाह मानदेय पर उसकी नियुक्ति हुई थी लेकिन उसे 10 हजार रुपये कैश सैलरी के रूप में मिलते थे। उसेे सैलरी नौकरी लगवाने वाला राज नाम का शख्स ही देता था। अनीता ने बताया कि बचे मानदेय के लिए उसने राज को कई बार फोन भी किया मगर उसने फोन रिसीव नहीं किया। अनीता के इस खुलासे के बाद आधिकारियों ने बताया कि हो सकता है फर्जी टीचरों की नियुक्ति के बाद राज टीचरों को आधी सैलरी ही देता रहा हो। अधिकारियों के मुताबिक, राज की गिरफ्तारी के बाद ही सैलरी से जुड़ी सच्चाई पता चल सकेगी। बीए फेल हेडमास्टर का छोटा भाई पुष्पेंद्र उर्फ राज उर्फ नीटू ही शिक्षिका फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें ताबड़तोड़ दबिशें दे रही है। मैनपुरी से कासगंज पुलिस ने गुरुवार को जसवंत उर्फ विभव को गिरफ्तार किया था। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। वो कन्नौज के एक प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर के पद पर तैनात था। पूछताछ में उसने कबूला कि उसने बीए द्वितीय वर्ष तक ही पढ़ाई की है। इसके बाद छोटे भाई पुष्पेंद्र के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया और विभव के नाम से कन्नौज के स्कूल में तैनाती ले ली। उससे मिले सुराग के आधार पर पुलिस की टीमें जहां-तहां दबिश दे रही है। उधर अंबेडकरनगर पुलिस को वहां अनामिका शुक्ला के नाम से तैनात शिक्षिका का पता चला तो उसने मैनपुरी से कनेक्शन खोजना शुरू किया। सभी संदिग्धों से पूछताछ के बाद मैनपुरी के बेवर में रहने वाली विधवा अनीता का खुलासा हुआ। इसके बाद बेवर पुलिस की मदद से अंबेडकरनगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और ले गई। वहीं गोंडा में जिस अनामिका शुक्ला ने खुद के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रदेश में फर्जी टीचरों की नियुक्ति का दावा किया था उसे एक एडेड स्कूल प्रबंधक ने नौकरी दे दी है। भैय्या चंद्रभान दत्त स्मारक विद्यालय रामपुर टेंगरहा के प्रबंधक दिग्विजय पाण्डेय ने अनामिका शुक्ला को अपने स्कूल के प्राथमिक अनुभाग में सहायक अध्यापिका के पद पर अस्थाई नौकरी दी है। शुक्रवार को सौंपे गए नियुक्ति पत्र में छात्रों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की कमी का हवाला दिया गया है।विद्यालय के प्रबंधक श्री पाण्डेय ने बताया नौकरी शासन की गाइडलाइन के मुताबिक वेतनमान के आधार पर दी गई है। अनामिका शुक्ला को नौकरी ज्वाइन करने के लिए तीन दिन का मोहलत दी गई है।   बीएसए ने भी दिया नौकरी का ऑफर : अनामिका शुक्ला ने बीएसए दफ्तर पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाई और खुद को बेरोजगार बताते हुए उसके शैक्षिक अभिलेखों का दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने उसे नौकरी का ऑफर दिया। बीएसए ने कहा कि जब कस्तूरबा विद्यालय में भर्ती निकलेगी तो फार्म जरूर भरिए, हाई मेरिट होने के कारण नौकरी लग जाएगी।