नसीरुद्दीन शाह के जीवन के कई राज़ खोलेगी ‘एंड देन वन डे’

मुंबई। हिन्दी फिल्म जगत में एक जाने माने नाम नसीरुद्दीन शाह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। त्रिदेव, मोहरा व गुलाम जैसी यादगार फिल्मों में अभिनय कर चुके नसीरुद्दीन शाह अपने जीवन में आए उतार चढ़ाव जनता के सामने लाने के लिए अपनी आत्मकथा लेकर आए हैं।

‘एंड देन वन डे’ उनके जीवन के ऐसे पहलुओं का परिचय देती है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। ये आत्मकथा नसीर जी के बचपन से रत्ना पाठक से उनके विवाह व उनकी पुत्री हिबा की उनके जीवन में वापसी की कहानी है। इस आत्मकथा में नसीरुद्दीन शाह ने अपने व अपने पिता के असहज संबंध, 19 वर्ष की उम्र में पहला विवाह व उनकी पुत्री हिबा व पत्नी परवीन का भारत छोड़ के चले जाना, रत्ना पाठक से दूसरा विवाह व पुत्री की जीवन में वापसी जैसे विषयों को बड़ी ही ईमानदारी से लिखा है। उन्होंने ये भी बताया कि जल्दी शादी कर लेने के कारण वो अपनी जिम्मेदारियों को बोझ समझते थे।

गांजे की लत ने बनाया होशियार —

नसीरुद्दीन शाह ने हमेशा इस बात को बिना किसी डर के स्वीकारा कि वो गांजे का सेवन करते थे। इससे वो कई बार निंदा का विषय बने पर उनका कहना है कि उन्होने कभी किसी को इसके लिए बढ़ावा नहीं दिया। वो अपनी इस आदत को अपनी समझदारी का जिम्मेदार मानते हैं। इस आत्मकथा को हैमिश हामिल्टन ने पब्लिश किया है। इसकी कीमत 699 रुपए रखी गयी है।