टीडीपी ने छोड़ा एनडीए, आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने से नाराज नायडू ने किया ऐलान

टीडीपी ने छोड़ा एनडीए, TDP, Chandra Babu Naidu
टीडीपी ने छोड़ा एनडीए, आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने से नाराज नायडू ने किया ऐलान

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगू देशम पार्टी के मुखिया ने केन्द्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार से अलग होने का फैसला लिया है। आन्ध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ टीडीपी लंबे समय से विशेष राज्य के दर्जे की मांग कर रही थी, जिसके लिए गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा ने इंकार कर दिया था।

Andhra Pradesh Didnt Get Special State Title Tdp Parts Way From Nda :

टीडीपी द्वारा गठबंधन से अलग होने की घोषणा करते हुए चन्द्र बाबू नायडू ने कहा कि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री से इस मामले पर ​बात करने के लिए समय की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। उन्होंने यह फैसला किसी नाराजगी के चलते नहीं लिया है वह अपने राज्य के हित के लिए उसके हक की मांग कर रहे थे।

वहीं टीडीपी की घोषणा से पहले केन्द्र सरकार का पक्ष रखते हुए केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि केन्द्र सरकार आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के साथ मिलने वाले वित्तीय पैकेज देने को तैयार है, लेकिन दर्जा देने का कोई सवाल नहीं उठता।

टीडीपी और भाजपा के बीच आई इस दूरी के बाद निश्चित हो गया है कि एनडीए सरकार में टीडीपी के कोटे से मंत्री दो सांसद अपने पदों से इस्तीफा सौंप देंगे।

आपको बता दें कि लंबे समय से टीडीपी और भाजपा के बीच खींचतान की खबरें आ रहीं थीं। इस दौरान दोनों ही पार्टियों के नेता किसी भी प्रकार के मनमुटाव की खबर को नकारते रहे थे। यह पूरा मामला उस समय खुल कर सामने आया जब सोमवार को शुरू हुए संसद के वित्तीय सत्र के दूसरे चरण को टीडीपी सांसदों ने हंगामा काटकर वाधित कर दिया।

जानिए क्या है विशेष राज्य के दर्जे का फंडा—

विशेष राज्य का दर्जा मिलने के ​बाद केन्द्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को मिलने वाली रकम में 90 फीसदी हिस्सा अनुदान के रूप में दिया जाता है, जबकि शेष 10 फीसदी कर्ज के रूप में दिया जाता है।

सामान्य राज्यों को मिलने वाली रकम में अनुदान का और कर्ज का अनुपात 70:30 का होता है।अब तक भारत के 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगू देशम पार्टी के मुखिया ने केन्द्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार से अलग होने का फैसला लिया है। आन्ध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ टीडीपी लंबे समय से विशेष राज्य के दर्जे की मांग कर रही थी, जिसके लिए गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा ने इंकार कर दिया था।टीडीपी द्वारा गठबंधन से अलग होने की घोषणा करते हुए चन्द्र बाबू नायडू ने कहा कि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री से इस मामले पर ​बात करने के लिए समय की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला। उन्होंने यह फैसला किसी नाराजगी के चलते नहीं लिया है वह अपने राज्य के हित के लिए उसके हक की मांग कर रहे थे।वहीं टीडीपी की घोषणा से पहले केन्द्र सरकार का पक्ष रखते हुए केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि केन्द्र सरकार आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के साथ मिलने वाले वित्तीय पैकेज देने को तैयार है, लेकिन दर्जा देने का कोई सवाल नहीं उठता।टीडीपी और भाजपा के बीच आई इस दूरी के बाद निश्चित हो गया है कि एनडीए सरकार में टीडीपी के कोटे से मंत्री दो सांसद अपने पदों से इस्तीफा सौंप देंगे।आपको बता दें कि लंबे समय से टीडीपी और भाजपा के बीच खींचतान की खबरें आ रहीं थीं। इस दौरान दोनों ही पार्टियों के नेता किसी भी प्रकार के मनमुटाव की खबर को नकारते रहे थे। यह पूरा मामला उस समय खुल कर सामने आया जब सोमवार को शुरू हुए संसद के वित्तीय सत्र के दूसरे चरण को टीडीपी सांसदों ने हंगामा काटकर वाधित कर दिया।जानिए क्या है विशेष राज्य के दर्जे का फंडा—विशेष राज्य का दर्जा मिलने के ​बाद केन्द्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को मिलने वाली रकम में 90 फीसदी हिस्सा अनुदान के रूप में दिया जाता है, जबकि शेष 10 फीसदी कर्ज के रूप में दिया जाता है।सामान्य राज्यों को मिलने वाली रकम में अनुदान का और कर्ज का अनुपात 70:30 का होता है।अब तक भारत के 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।