अंग्रेजी माध्यम से मान्यता प्राप्त झालू में मात्र दो स्कूल

Angrezi Madhyam Se Manyata Prapt Jhalu Men Matr Do Sachool

बिजनौर। हैरानी की बात है कि जिस झालू की लगभग हर गली-मौहल्ले में प्राइवेट स्कूल कुकरमुत्तों की तरह खुले हैं और लगभग हर संचालक अपने स्कूल को इंग्लिश मीडियम बता रहा है, उस नगरी में मात्र दो स्कूलों ही मान्यता अंग्रेजी माध्यम से है, शेष सभी स्कूलों की मान्यता हिन्दी माध्यम से है अथवा है ही नहीं। अधिकारियों की नाक के नीचे अभिभावकों को गुमराह कर न सिर्फ उनकी जेब पर डाका डाला जा रहा है, बल्कि उनके अरमानों पर भी पानी फेरा जा रहा है।



जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर दूर कस्बा झालू सिथत है। इसकी तहसील भले ही बिजनौर लगती हो, लेकिन ब्लाक क्षेत्र हल्दौर होने के कारण इस क्षेत्र की शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी एबीएसए हल्दौर प्रमोद शर्मा के कंधों पर है। बीएसए कार्यालय भी एबीएसए कार्यालय के लगभग समान दूरी पर स्थित है। इस कारण इस नगर में स्कूल माफियाओं के दिलों में बीएसए महेश चंद का भी डर होना चाहिए, लेकिन यहां की कहानी बिल्कुल उल्टी है। यहां पर नगर की लगभग हर गली और मौहल्ले में प्राइवेट स्कूल खुले हुए हैं, वहीं नगर के बाहरी क्षेत्रों में भी बड़े-बड़े भवन बनाकर स्कूलों को स्थापित कर दिया गया है।

नगर के अधिकांश स्कूलों के संचालक दावा करते हैं कि उनका स्कूल इंग्लिश मीडियम है और उनकी मान्यता अंग्रेजी माध्यम से है। ये संचालक अपने स्कूल में प्रवेश संबंधी जानकारी लेने आने वाले अभिभावकों से ही केवल इस बारे में नहीं कहते, बल्कि उनके घर जाकर व प्रचार सामग्री में इन दावों को बड़ा-चढ़ाकर किया जाता है। अभिभावक इन संचालकों की बातों में फंसकर भारी-भरकम फीस देकर अपने बच्चों को स्कूल में भेज भी देते हैं, लेकिन जब उनके सामने सच्चाई आती है, तब वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

अफसोस तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उनकी जेब पर न सिर्फ डाका पड़ चुका होता है, बल्कि उनके अरमानों पर भी पानी फिर चुका होता है। दरअसल स्कूल संचालकों के दावों में अतिश्योक्ति होने पर उनकी हकीकत एबीएसए कार्यालय से जानने का प्रयास किया गया। वहां से मिली जानकारी हैरान करने वाली थी। एबीएस कार्यालय से बताया गया कि झालू में रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित ग्रेट इंडियन एकेडमी व मौहल्ला चौधरियान स्थित वीएम पब्लिक स्कूल की मान्यता अंग्रेजी माध्यम से है, शेष स्कूलों ने हिन्दी माध्यम से मान्यता ले रखी है।




नगर में मात्र दो स्कूलों की मान्यता अंग्रेजी माध्यम से होने की पुष्टि होने के बाद उन स्कूल संचालकों की पोल खुल गई जो अपने स्कूलों की मान्यता अंग्रेजी माध्यम से होने का दावा कर अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं। इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि नगर में बिना मान्यता के भी स्कूल संचालित होंगे। नगर में फैले प्राइवेट स्कूलोंके जाल में कितने स्कूल मान्यता प्राप्त है अथवा सरकारी मानकों को पूरा कर रहे हैं, कहना मुश्किल है। उधर नगर में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षा माफियाओं के सक्रिय होने के बावजूद कोई कार्यवाही न होना अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

समझ में नहीं आ रहा कि अभी तक अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया नहीं या निजी स्वार्थो के चलते ध्यान देना नहीं चाहा, यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है। इस मामले में एबीएसए हल्दौर प्रमोद शर्मा से बात की गयी। उन्होंने खुद को तहसील दिवस में बताते हुए कहा कि झालू में स्कूलों की मान्यता संबंधी पूरी जानकारी कार्यालय से मिल सकती है। उन्होंने इस संबंध में कार्यालय के बाबू से सम्पर्क करने को कहा। साथ ही स्कूलों की मान्यता संबंधी जांच कर कार्यवाही करने की बात कही।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

बिजनौर। हैरानी की बात है कि जिस झालू की लगभग हर गली-मौहल्ले में प्राइवेट स्कूल कुकरमुत्तों की तरह खुले हैं और लगभग हर संचालक अपने स्कूल को इंग्लिश मीडियम बता रहा है, उस नगरी में मात्र दो स्कूलों ही मान्यता अंग्रेजी माध्यम से है, शेष सभी स्कूलों की मान्यता हिन्दी माध्यम से है अथवा है ही नहीं। अधिकारियों की नाक के नीचे अभिभावकों को गुमराह कर न सिर्फ उनकी जेब पर डाका डाला जा रहा है, बल्कि उनके अरमानों पर…